27 Lakh Fraud :- सरकारी नौकरी का नाम सुनते ही घर में उम्मीद जाग उठती है। माता-पिता सोचते हैं कि अब बेटे का भविष्य सुरक्षित हो जाएगा और युवा खुद को एक स्थिर जिंदगी की ओर बढ़ता हुआ देखते हैं। लेकिन जब इसी सपने को हथियार बनाकर कोई ठग सामने आ जाए, तो सिर्फ पैसे नहीं जाते, भरोसा भी टूट जाता है। रुद्रप्रयाग के तीन युवकों के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने उन्हें मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक रूप से झकझोर कर रख दिया।
रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ निवासी छात्र अमित सिंह के अनुसार, उनकी माता को एक जानकार पवन सकलानी ने भरोसा दिलाया कि उसके परिचित लोग केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री आफ कमीशन डिपार्टमेंट में नौकरी लगवाते हैं। कहा गया कि पहले भी कई युवकों की नौकरी लगवाई जा चुकी है और इसके बदले तय रकम ली जाती है। परिवार ने भरोसा किया और यही भरोसा उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुआ।
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आरोप है कि गौरव कुमार, उनकी पत्नी अलका चौधरी और अंकुर वर्मा ने अमित सिंह की माता को पूरी तरह विश्वास में लेकर 12 लाख रुपये ले लिए। नौकरी का सपना इतना मजबूत दिखाया गया कि अमित ने यह बात अपने दोस्तों ठाकुर सिंह और अन्द्र निवासी अगस्त्यमुनि को भी बताई। सरकारी नौकरी की उम्मीद में दोनों दोस्त भी तैयार हो गए और उनसे भी 15 लाख रुपये ले लिए गए। इस तरह तीन युवकों से कुल 27 लाख रुपये ठग लिए गए।
करीब छह महीने तक जब नौकरी को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं मिली, तो सवाल उठने शुरू हुए। इसी बीच आरोपितों ने 21 दिसंबर 2024 को ईमेल के माध्यम से मिनिस्ट्री आफ कमीशन डिपार्टमेंट में यूडीसी पद का नियुक्तिपत्र भेजा। कागज देखकर एक पल को उम्मीद फिर जागी, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिक सकी।
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आरोपितों ने इंटरव्यू के बहाने युवकों को डाक भवन, दिल्ली बुलाया और वहां पहुंचने पर अतिरिक्त रकम की मांग की। यहीं से शक गहराने लगा। जब नियुक्तिपत्र की जांच करवाई गई, तो सामने आया कि वह पूरी तरह फर्जी था। ठगी का एहसास होते ही युवकों ने अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन इसके बदले उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
पीड़ितों ने 27 अप्रैल 2025 को जिलाधिकारी देहरादून, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून और एसएसपी टिहरी गढ़वाल को डाक के माध्यम से शिकायत भेजी। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। निराश होकर आखिरकार उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट के आदेश के बाद पटेलनगर कोतवाली पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
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यह मामला सिर्फ पैसों की ठगी नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं की उम्मीदों पर चोट है, जो मेहनत और ईमानदारी से सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते हैं। ऐसे मामलों से यह साफ हो जाता है कि नौकरी के नाम पर किसी भी तरह के दलालों और झूठे वादों से सावधान रहना कितना जरूरी है।




