Bharat Singh Chaudhary Controversial Statement :- उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग से भारतीय जनता पार्टी के विधायक भरत चौधरी का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो करीब एक सप्ताह पुराना है, लेकिन इसकी भाषा और तेवर आज भी उतने ही तीखे हैं। मंच से दिए गए इस बयान में विधायक अधिकारियों पर खुलकर नाराज़गी जताते नज़र आते हैं और उनकी बातों में गुस्सा साफ झलकता है।
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वीडियो में विधायक यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि जो अधिकारी उनकी बात नहीं सुनेगा, उसे वे “अपने जूते” से सुनाएंगे। यह एक ऐसा वाक्य है जिसने न सिर्फ प्रशासनिक हलकों को असहज किया है, बल्कि आम लोगों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सत्ता की भाषा इतनी कठोर कैसे हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज को लेकर आक्रामक रुख
इसी कार्यक्रम में विधायक ने रुद्रप्रयाग में मेडिकल कॉलेज बनाए जाने को लेकर भी बेहद आक्रामक अंदाज़ अपनाया। उनका कहना था कि ज़िले में मेडिकल कॉलेज बनेगा और कोई भी ताकत इसे रोक नहीं सकती। उन्होंने यहां तक कह दिया कि किसी के बाप की ताकत नहीं है जो इस योजना को रोक सके। यह बयान विकास की प्रतिबद्धता से ज़्यादा चुनौती और टकराव की भावना को दर्शाता है।

विधायक ने आगे यह भी कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन कहां आता है या जाता है। जनता ने उन्हें आशीर्वाद देकर विधानसभा भेजा है और किसी नेता या अधिकारी की हिम्मत नहीं है कि उनकी बात को अनसुना कर सके। इन शब्दों में आत्मविश्वास कम और सत्ता का अहंकार ज़्यादा महसूस किया जा रहा है।
राजनीतिक माहौल हुआ गरम
इस बयान के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए कड़ी आलोचना की है और पार्टी नेतृत्व से कार्रवाई की मांग उठाई है। प्रशासनिक अधिकारियों के बीच भी इस बयान को लेकर नाराज़गी और असहजता की चर्चा है, क्योंकि इस तरह की भाषा सीधे तौर पर संस्थागत सम्मान पर चोट करती है।
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फिलहाल इस पूरे मामले पर न तो भाजपा संगठन की ओर से और न ही विधायक की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। उत्तराखंड की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि सवाल सिर्फ एक बयान का नहीं, बल्कि सत्ता की जिम्मेदारी और उसकी भाषा का है। लोकतंत्र में चुने हुए प्रतिनिधि जनता की आवाज़ होते हैं। उनकी भाषा, उनका व्यवहार और उनके शब्द समाज को दिशा देते हैं। ऐसे में जब मंच से धमकी और अपमान की भाषा सुनाई देती है, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं रहता, बल्कि पूरी व्यवस्था की छवि से जुड़ जाता है।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और वायरल वीडियो पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार किसी व्यक्ति, संस्था या राजनीतिक दल की छवि को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं लिखे गए हैं।




