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5 साल में 826 स्कूलों पर लगे ताले, देखिये जिलेवार आंकड़े !

By A S
March 15, 2026 8:37 AM
826 Primary Schools Closed In Uttarakhand :- 5 साल में 826 स्कूलों पर लगे ताले, देखिये जिलेवार आंकड़े !
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826 Primary Schools Closed In Uttarakhand :- पहाड़ों के शांत गांवों में कभी बच्चों की हंसी और स्कूल की घंटी की आवाज गूंजा करती थी। सुबह-सुबह बच्चे बैग लेकर पगडंडियों से गुजरते हुए स्कूल पहुंचते थे और गांव का माहौल जीवंत बना रहता था। लेकिन अब उत्तराखंड के कई गांवों में यह दृश्य धीरे-धीरे गायब होता जा रहा है। कई जगह स्कूलों के दरवाजों पर ताले लग चुके हैं और जो स्कूल कभी बच्चों से भरे रहते थे, आज वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। यह स्थिति केवल शिक्षा व्यवस्था की नहीं बल्कि पहाड़ों में बदलते सामाजिक और आर्थिक हालात की भी कहानी कहती है।

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पांच साल में 826 प्राथमिक स्कूल बंद

उत्तराखंड विधानसभा में हाल ही में सामने आए आंकड़ों ने इस चिंता को और गंभीर बना दिया है। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने जानकारी दी कि पिछले लगभग पांच वर्षों में राज्य के 826 प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुके हैं। इन स्कूलों को इसलिए बंद करना पड़ा क्योंकि वहां पढ़ने वाले बच्चों की संख्या बेहद कम रह गई थी।

कई जगह तो हालात ऐसे हो गए थे कि पूरे स्कूल में सिर्फ दो या तीन छात्र ही पढ़ रहे थे। सरकार का कहना है कि ऐसे स्कूलों को बंद करने के बाद बच्चों को नजदीकी बड़े स्कूलों में समायोजित किया गया है, ताकि उन्हें बेहतर पढ़ाई का माहौल और अधिक सुविधाएं मिल सकें। साथ ही राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 808 प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी जारी है।

826 Primary Schools Closed In Uttarakhand :- 5 साल में 826 स्कूलों पर लगे ताले, देखिये जिलेवार आंकड़े !

विधानसभा में उठे सवालों ने दिखाई वास्तविक तस्वीर

इस मुद्दे को विधानसभा में बीजेपी विधायक महेश जीना ने उठाया था। इसके बाद सरकार की ओर से दिए गए आंकड़ों ने यह साफ कर दिया कि पहाड़ी इलाकों में स्कूलों की स्थिति लगातार बदल रही है। छात्रों की घटती संख्या के कारण कई स्कूलों को बंद करना पड़ा है। ये आंकड़े केवल प्रशासनिक निर्णय की कहानी नहीं बताते, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि पहाड़ों में आबादी का संतुलन किस तरह बदल रहा है और इसका असर शिक्षा पर कैसे पड़ रहा है।

जिलों के आंकड़ों से समझ में आती है समस्या की गहराई

जब जिलों के आंकड़ों पर नजर डालते हैं तो यह साफ दिखाई देता है कि सबसे ज्यादा असर पहाड़ी जिलों में पड़ा है। टिहरी गढ़वाल जिले में सबसे अधिक 262 स्कूल बंद हुए हैं। इसके बाद पौड़ी गढ़वाल में 120 और पिथौरागढ़ में 104 स्कूलों पर ताले लग चुके हैं।

इसके अलावा अल्मोड़ा में 83, नैनीताल में 49, चमोली में 43 और देहरादून में 38 स्कूल बंद हुए हैं। चंपावत में 34, उत्तरकाशी में 25, बागेश्वर में 25 और उधम सिंह नगर में 21 स्कूल बंद किए गए हैं। रुद्रप्रयाग में 15 और हरिद्वार में 2 स्कूलों के बंद होने की जानकारी भी सामने आई है। इन आंकड़ों से साफ होता है कि पहाड़ों के जिलों में स्कूलों के बंद होने की समस्या ज्यादा गंभीर है।

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पलायन बना शिक्षा संकट की सबसे बड़ी वजह

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे समय से पलायन एक बड़ी सामाजिक समस्या रहा है। रोजगार की तलाश, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और आधुनिक जीवन की चाह में हजारों परिवार हर साल गांवों से शहरों की ओर जा रहे हैं। जब परिवार गांव छोड़ देते हैं तो स्वाभाविक रूप से बच्चों की संख्या भी कम हो जाती है। इसी कारण कई गांवों में स्कूल तो मौजूद हैं लेकिन वहां पढ़ने वाले बच्चों की संख्या बेहद कम रह गई है। ऐसे हालात में पूरे स्कूल को चलाना शिक्षा विभाग के लिए मुश्किल हो जाता है और अंततः उन्हें बंद करने का निर्णय लेना पड़ता है।

826 Primary Schools Closed In Uttarakhand :- 5 साल में 826 स्कूलों पर लगे ताले, देखिये जिलेवार आंकड़े !

बुनियादी सुविधाओं की कमी भी बड़ी समस्या

शिक्षाविद शिव शंकर जायसवाल का मानना है कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी छात्रों की घटती संख्या का एक बड़ा कारण है। कई विद्यालयों के भवन जर्जर हालत में हैं और वहां पर्याप्त कक्षाओं की व्यवस्था नहीं है। कुछ स्कूलों में शौचालय, साफ पानी और खेल मैदान जैसी जरूरी सुविधाएं भी ठीक से उपलब्ध नहीं हैं।

ऐसे माहौल में अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के बजाय निजी स्कूलों को बेहतर विकल्प मानते हैं। यही कारण है कि सरकारी विद्यालयों में नामांकन लगातार कम होता जा रहा है। इसके साथ ही कई जगह शिक्षकों की कमी भी लंबे समय से बनी हुई है।

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पहाड़ों की शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती

उत्तराखंड में पांच वर्षों के भीतर 826 प्राथमिक स्कूलों का बंद होना एक गंभीर संकेत माना जा रहा है। यह स्थिति बताती है कि पहाड़ों में शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। पलायन, घटती छात्र संख्या, बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षकों की समस्या मिलकर इस संकट को और गहरा बना रही हैं।

अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में और भी स्कूल बंद हो सकते हैं। इससे पहाड़ों के बच्चों की शिक्षा और भविष्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि सरकार और समाज मिलकर ऐसी योजनाएं बनाएं जिससे गांवों में शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो सके और पलायन को भी कम किया जा सके।

Disclaimer :- यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। आंकड़ों और तथ्यों में समय के साथ बदलाव संभव है, इसलिए किसी भी आधिकारिक निर्णय या पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी स्रोतों की जांच अवश्य करें।

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