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देहरादून में छात्र ने MBA की फीस चुकाने के लिए बेची किडनी, 9 लाख में सौदे के नाम पर छात्र हुआ ठगी का शिकार !

By A S
April 1, 2026 12:05 PM
Dehradun MBA Student Kidney Case :- देहरादून में छात्र ने MBA की फीस चुकाने के लिए बेची किडनी, 9 लाख में सौदे के नाम पर छात्र हुआ ठगी का शिकार !
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Dehradun MBA Student Kidney Case :- देहरादून से सामने आई यह खबर सुनकर दिल दहल जाता है। एक युवा, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए एमबीए की पढ़ाई कर रहा था, उसे ऐसी मजबूरी का सामना करना पड़ा कि उसने अपनी ही किडनी बेचने का फैसला कर लिया। यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उस कड़वी सच्चाई को दिखाती है जिसमें कई छात्र आर्थिक तंगी के कारण गलत रास्तों की ओर धकेल दिए जाते हैं।

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फीस की मजबूरी ने बदल दी जिंदगी

पीड़ित छात्र एक नामी कॉलेज से एमबीए कर रहा था और अपनी पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर था। लेकिन जब उसे फीस भरने के लिए कोई लोन नहीं मिला, तो उसकी उम्मीदें धीरे-धीरे टूटने लगीं। हर दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब कोई मदद नहीं मिली, तब उसने एक ऐसा फैसला लिया, जिसके बारे में शायद उसने खुद भी कभी नहीं सोचा होगा। करीब 5-6 महीने पहले वह टेलीग्राम पर एक किडनी डोनर ग्रुप से जुड़ा। शुरुआत में यह सिर्फ एक विकल्प जैसा लगा, लेकिन आर्थिक दबाव ने उसे इस खतरनाक रास्ते पर आगे बढ़ा दिया। एक सौदा तय हुआ, जिसमें उसे 9 लाख रुपये मिलने थे, लेकिन समय के साथ यह रकम घटाकर 6 लाख कर दी गई।

Dehradun MBA Student Kidney Case :- देहरादून में छात्र ने MBA की फीस चुकाने के लिए बेची किडनी, 9 लाख में सौदे के नाम पर छात्र हुआ ठगी का शिकार !

ऑपरेशन के बाद हुआ धोखा

छात्र को उम्मीद थी कि कम से कम तय की गई रकम से उसकी पढ़ाई पूरी हो जाएगी। लेकिन ऑपरेशन के बाद जो हुआ, वह और भी ज्यादा दर्दनाक था। उसके खाते में सिर्फ 3.5 लाख रुपये ही डाले गए। यानी जिस कीमत पर उसने अपनी किडनी दी, उसका भी पूरा पैसा उसे नहीं मिला। इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया कि अवैध अंग व्यापार में शामिल लोग कितने निर्दयी होते हैं, जो किसी की मजबूरी का फायदा उठाकर उसे ठगने से भी नहीं चूकते।

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कानपुर में हुआ ऑपरेशन, बड़ा नेटवर्क बेनकाब

जांच में सामने आया कि छात्र की किडनी का ऑपरेशन कानपुर के एक अस्पताल में किया गया। इस घटना के बाद पुलिस हरकत में आई और एक बड़े अवैध किडनी रैकेट का पर्दाफाश किया। इस नेटवर्क की जड़ें सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं थीं, बल्कि यह लखनऊ और नोएडा तक फैला हुआ था। जरूरत पड़ने पर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता था, जिससे यह पूरा सिस्टम काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था।

डॉक्टर और दलाल गिरफ्तार, जांच जारी

पुलिस ने इस मामले में प्रीति आहूजा समेत पांच डॉक्टरों और एक दलाल को गिरफ्तार किया है। हालांकि, दो डॉक्टर और चार अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी हुई है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस केस में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। जांच के दौरान पता चला कि छात्र का नाम साइबर अपराध से भी जुड़ा हुआ है। उस पर म्यूल अकाउंट बनवाने और अपराधियों के संपर्क में रहने के आरोप हैं। इस एंगल से भी जांच जारी है, जिससे मामले की जटिलता और बढ़ गई है।

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समाज के लिए एक बड़ा सवाल

यह घटना सिर्फ एक छात्र की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था इतनी महंगी हो चुकी है कि छात्रों को अपने शरीर के अंग बेचने तक की नौबत आ जाए? और क्या आर्थिक मदद की कमी युवाओं को गलत रास्तों की ओर धकेल रही है? यह जरूरी है कि ऐसे मामलों से सबक लिया जाए और छात्रों को समय पर आर्थिक सहायता और सही मार्गदर्शन दिया जाए, ताकि कोई भी युवा अपने सपनों की कीमत अपनी जिंदगी से न चुकाए।

Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच जारी है, इसलिए कुछ तथ्य समय के साथ बदल सकते हैं। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना आवश्यक है।

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