Husband Kills Wife Over Dowry Demand :- देहरादून के शांत माने जाने वाले सेलाकुई इलाके से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया है। एक रिश्ते की नींव प्यार और भरोसे पर टिकती है, लेकिन जब उसी रिश्ते में शक और लालच घर कर जाए, तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है, यह इस घटना ने दिखा दिया। एक पति ने अपनी ही पत्नी की जान ले ली और फिर इसे सामान्य मौत बताकर सच्चाई छिपाने की कोशिश की।
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दहेज और शक ने ली एक मासूम की जान
यह मामला उत्तराखंड के Dehradun जिले के सेलाकुई क्षेत्र का है, जहां आरोपी पति ने अपनी पत्नी शाहीन बानो की गला घोंटकर हत्या कर दी। इस घटना के पीछे दो बड़ी वजहें सामने आई हैं दहेज में मोटरसाइकिल की मांग और पत्नी के चरित्र पर शक। मृतका के पिता लाल मोहम्मद ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि साल 2025 में शादी के बाद से ही उनकी बेटी को दहेज के लिए परेशान किया जा रहा था। आरोपी लगातार बाइक की मांग करता था और इसी बात को लेकर घर में अक्सर तनाव बना रहता था। एक छोटी-सी मांग ने धीरे-धीरे एक खतरनाक रूप ले लिया।
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झगड़ा, गुस्सा और एक खौफनाक फैसला
पुलिस जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन भी पति-पत्नी के बीच कहासुनी हुई थी। आरोपी को अपनी पत्नी पर शक था और इसी वजह से दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। गुस्से में आकर उसने चुन्नी से अपनी पत्नी का गला घोंट दिया। हत्या के बाद उसने लोगों को गुमराह करने के लिए इसे बीमारी से हुई मौत बताने की कोशिश की। लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई, तो सच्चाई सामने आ गई और पूरा मामला खुल गया।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
सेलाकुई थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई की। आरोपी, जिसकी पहचान उत्तर प्रदेश के Lakhimpur Kheri निवासी आरिफ के रूप में हुई है, को रविवार देर रात बाजार से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ काम के सिलसिले में सेलाकुई आया था और किराए के कमरे में रह रहा था। दहेज की मांग पूरी न होने और शक के कारण उसके मन में लगातार गुस्सा और तनाव बढ़ता जा रहा था, जो आखिरकार इस खौफनाक घटना में बदल गया।
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यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है। क्या आज भी दहेज जैसी कुप्रथा इतनी गहरी जड़ें जमाए हुए है कि लोग इंसानियत भूल जाते हैं? और क्या रिश्तों में भरोसे की जगह शक इतना हावी हो सकता है कि कोई इतना बड़ा कदम उठा ले? ऐसे मामलों में केवल कानून का डर ही नहीं, बल्कि समाज की सोच में बदलाव भी बेहद जरूरी है। जब तक दहेज और शक जैसी सोच खत्म नहीं होगी, तब तक ऐसे दर्दनाक हादसे सामने आते रहेंगे।
Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध समाचार जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल सूचना देना है, किसी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं है। घटना से जुड़े सभी तथ्य जांच के अधीन हैं और आधिकारिक पुष्टि के अनुसार बदल सकते हैं।




