Dehradun Fuel Supply Crisis :- देहरादून के लोगों के लिए इन दिनों वाहन चलाना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। शहर के कई पेट्रोल पंपों पर कभी पेट्रोल तो कभी डीजल खत्म होने की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में रोजाना सफर करने वाले वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि तेल कंपनियां लगातार यह दावा कर रही हैं कि ईंधन की आपूर्ति सामान्य है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। शहर के कई पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि एडवांस भुगतान करने के बावजूद उन्हें समय पर ईंधन की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।
डिपो से टैंकरों की देरी से डिलीवरी होने के कारण कई बार पंपों पर पेट्रोल और डीजल का स्टॉक खत्म हो जाता है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जिन्हें ईंधन भरवाने के लिए एक पंप से दूसरे पंप तक भटकना पड़ रहा है। हाल ही में अजबपुर स्थित माता मंदिर रोड और पथरी बाग चौक के इंडियन ऑयल पेट्रोल पंपों पर ऐसी स्थिति देखने को मिली, जहां समय पर आपूर्ति नहीं होने के कारण सामान्य पेट्रोल उपलब्ध नहीं रहा। यहां तक कि पंप प्रबंधन को ग्राहकों को सूचना देने के लिए मशीनों पर पेट्रोल खत्म होने के नोटिस भी लगाने पड़े।
पश्चिम एशिया का तनाव और बढ़ती मांग बनी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े दबावों का असर देशभर में महसूस किया जा रहा है। उत्तराखंड में इस समय पर्यटन सीजन और चारधाम यात्रा अपने चरम पर है। बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु राज्य में पहुंच रहे हैं, जिससे वाहनों की संख्या अचानक बढ़ गई है। वाहनों की बढ़ती आवाजाही के कारण पेट्रोल और डीजल की मांग में भी लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में आपूर्ति श्रृंखला पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है, जिसका असर देहरादून समेत कई क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।

इंडियन ऑयल के पंपों पर अधिक दिख रही समस्या
देहरादून जिले में इंडियन ऑयल का सबसे बड़ा नेटवर्क मौजूद है। जिले के कुल 165 पेट्रोल पंपों में से 71 पंप इंडियन ऑयल के हैं। इसके अलावा हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 40 और भारत पेट्रोलियम के 34 पेट्रोल पंप संचालित हो रहे हैं। सबसे अधिक शिकायतें इंडियन ऑयल से जुड़े पंपों से सामने आ रही हैं। वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, रिलायंस और नायरा के पंपों पर स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है। तेल कंपनियां कभी ट्रैफिक जाम तो कभी टैंकरों की उपलब्धता में देरी को इसकी वजह बता रही हैं।
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सीएनजी वाहनों को भी झेलनी पड़ रही मुश्किलें
केवल पेट्रोल और डीजल ही नहीं, बल्कि सीएनजी वाहन चालकों को भी राहत नहीं मिल रही है। जिले में सीएनजी की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके अनुरूप बुनियादी ढांचे का विकास अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। देहरादून में मौजूद 16 सीएनजी पंपों में से केवल 5 पंप ही स्टील पाइपलाइन नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। बाकी पंपों तक सीएनजी सिलेंडरों से भरे वाहनों के जरिए पहुंचाई जाती है। ट्रैफिक और जाम की वजह से ये वाहन समय पर नहीं पहुंच पाते, जिससे कई बार पंपों पर सीएनजी खत्म हो जाती है और लंबी कतारें लग जाती हैं।
अधूरी पाइपलाइन परियोजना बढ़ा रही चिंता
गेल गैस लिमिटेड द्वारा जिले में सीएनजी आपूर्ति को मजबूत बनाने के लिए स्टील पाइपलाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। पहले चरण में 50 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन अब तक केवल 32 किलोमीटर पाइपलाइन ही चार्ज हो सकी है। करीब 18 किलोमीटर पाइपलाइन का कार्य अभी भी अधूरा है। जब तक यह परियोजना पूरी नहीं होती, तब तक जिले के सभी सीएनजी पंपों तक पाइपलाइन के माध्यम से निर्बाध गैस आपूर्ति संभव नहीं हो पाएगी।

प्रशासन ने जांच और निगरानी का दिया भरोसा
जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल के अनुसार जिले के सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त ईंधन स्टॉक उपलब्ध है और तेल कंपनियां नियमित रूप से आपूर्ति कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जिन पंपों पर बार-बार ईंधन खत्म होने की शिकायतें मिल रही हैं, उनकी गंभीरता से जांच की जाएगी। साथ ही प्रशासन सीएनजी आपूर्ति व्यवस्था को भी बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है और पूरे जिले की ईंधन व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
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देहरादून में ईंधन आपूर्ति से जुड़ी मौजूदा स्थिति आम लोगों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। पर्यटन सीजन, चारधाम यात्रा और बढ़ती ईंधन मांग के बीच आपूर्ति में आने वाली देरी ने वाहन चालकों और पेट्रोल पंप संचालकों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में यदि आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत नहीं किया गया, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध जानकारी और संबंधित अधिकारियों द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। किसी भी आधिकारिक सूचना या निर्णय के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता दें।




