DM’s Surprise Inspection At Coronation Hospital :- अस्पताल वह जगह होती है जहां मरीज और उनके परिजन उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। लेकिन जब इलाज की जगह लापरवाही, गंदगी और बदहाल व्यवस्थाएं सामने आएं तो यह किसी भी परिवार के लिए चिंता का विषय बन जाता है। बुधवार रात हुए एक औचक निरीक्षण में अस्पताल की ऐसी ही तस्वीर सामने आई जिसने प्रशासन को भी हैरान कर दिया। देर रात अस्पताल पहुंचे जिलाधिकारी ने जब वार्डों का निरीक्षण किया तो कई ऐसी कमियां मिलीं, जिन पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए।
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बुधवार रात करीब 8 बजे जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान अचानक अस्पताल के सर्जरी वार्ड पहुंचे। यहां एक लावारिस मरीज जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करता मिला। मरीज का शुगर लेवल 40 से भी नीचे पहुंच चुका था, लेकिन उसकी देखभाल करने वाला कोई मौजूद नहीं था। मरीज के आसपास बासी खाने की प्लेटें पड़ी थीं और पूरे क्षेत्र में गंदगी फैली हुई थी। निरीक्षण के दौरान यह स्थिति देखकर जिलाधिकारी ने तुरंत चिकित्सा टीम को मरीज का इलाज शुरू करने के निर्देश दिए। प्रशासनिक टीम के पहुंचने से कुछ ही मिनट पहले वार्ड में जल्दबाजी में सफाई कराए जाने की भी जानकारी सामने आई, जिससे अस्पताल प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए।
ICU में बंद मिला AC, मरीज उमस में परेशान
निरीक्षण के दौरान आईसीयू की स्थिति भी चिंताजनक मिली। जीवन रक्षक उपकरणों से घिरे मरीज भीषण गर्मी और उमस में इलाज करा रहे थे क्योंकि वहां एयर कंडीशनिंग सिस्टम बंद था। बताया गया कि अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी को कई बार एसी चालू कराने के लिए कहा गया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी किए और अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से भी जवाब तलब किया।

दवाओं के रिकॉर्ड में मिली बड़ी गड़बड़ी
निरीक्षण के दौरान आईसीयू के स्टॉक रजिस्टर की जांच की गई तो पता चला कि 29 जून के बाद से दवाओं की कोई नई एंट्री दर्ज नहीं की गई थी। दवाओं के रिकॉर्ड का इस तरह गायब होना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया। जांच में यह भी सामने आया कि सिस्टर इंचार्ज आकस्मिक अवकाश पर थीं और स्टाफ की उपस्थिति रजिस्टर में भी कई अनियमितताएं दर्ज मिलीं। जिलाधिकारी ने पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए।
बेवजह मरीज को रेफर करने की तैयारी पर लगी रोक
पुरुष वार्ड में लिवर की बीमारी से पीड़ित एक मरीज की फाइल दूसरे अस्पताल रेफर करने के लिए तैयार की जा रही थी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने मरीज की स्थिति का आकलन किया और पाया कि उसका इलाज उसी अस्पताल में संभव था। इसके बाद उन्होंने अनावश्यक रेफरल प्रक्रिया पर रोक लगाने के निर्देश दिए ताकि मरीज को बिना वजह दूसरे अस्पताल भेजने की नौबत न आए।
फटे कंबल और खराब व्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी
निरीक्षण के दौरान कई मरीजों के बिस्तरों पर फटे हुए कंबल मिले। इस पर जिलाधिकारी ने अस्पताल की मैट्रन से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा और सभी पुराने एवं फटे कंबलों को तुरंत हटाने के आदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को सम्मानजनक और सुरक्षित सुविधाएं मिलना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

लिफ्ट से लेकर शौचालय तक मिली कई गंभीर कमियां
अस्पताल की लिफ्ट में पान की पीक लगी हुई मिली और वहां सुरक्षा के लिए कोई सीसीटीवी कैमरा मौजूद नहीं था। इसके अलावा महिला शौचालय में पुरुष यूरिनल लगा होने जैसी गंभीर व्यवस्था संबंधी कमी भी सामने आई। इन हालात को देखकर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और पूरे अस्पताल परिसर में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
सीएमओ और सीएमएस से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
निरीक्षण के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की संयुक्त समिति गठित कर दी गई है। दोनों अधिकारियों से अस्पताल में मिली कमियों और लापरवाहियों पर विस्तृत रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान जिलाधिकारी ने बाल रोग वार्ड सहित अन्य वार्डों में जाकर मरीजों और उनके परिजनों से सीधे बातचीत की। उन्होंने इलाज, साफ-सफाई और उपलब्ध सुविधाओं को लेकर फीडबैक लिया तथा मौजूद चिकित्सा अधिकारियों और कर्मचारियों को व्यवस्थाएं तुरंत सुधारने की सख्त हिदायत दी।
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अस्पताल की व्यवस्था पर उठे कई सवाल
इस निरीक्षण ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों की सुरक्षा, समय पर इलाज, साफ-सफाई और आवश्यक सुविधाओं को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद अस्पताल की व्यवस्था में कितना सुधार आता है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी और निरीक्षण के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। यदि संबंधित विभाग की ओर से भविष्य में कोई नई आधिकारिक जानकारी या स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उसके अनुसार तथ्यों में बदलाव संभव है। हमारा उद्देश्य केवल निष्पक्ष और तथ्यात्मक जानकारी पाठकों तक पहुंचाना है।




