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गार्ड की नौकरी करने पर मजबूर उत्तराखंड का गोल्ड मेडलिस्ट MMA फाइटर !

By A S
July 13, 2026 4:42 PM
MMA Fighter Virendra Singh Tomkyal :- गार्ड की नौकरी करने पर मजबूर उत्तराखंड का गोल्ड मेडलिस्ट MMA फाइटर !
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MMA Fighter Virendra Singh Tomkyal :- हर खिलाड़ी की कहानी सिर्फ मेडल और ट्रॉफी तक सीमित नहीं होती। कई बार जीत के पीछे ऐसी संघर्षभरी जिंदगी छिपी होती है, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो जाती हैं। उत्तराखंड के एक युवा खिलाड़ी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में शादी समारोह में पार्किंग कराते एक युवक को देखकर लोग उसे सामान्य सिक्योरिटी गार्ड समझ बैठे। लेकिन जब उसकी असली पहचान सामने आई तो हर कोई हैरान रह गया।

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यह युवक कोई और नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीत चुके उत्तराखंड के MMA फाइटर वीरेंद्र सिंह हैं, जो आर्थिक तंगी के बावजूद अपने सपनों को जिंदा रखे हुए हैं।सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में वीरेंद्र सिंह शादी समारोह में सिक्योरिटी गार्ड की वर्दी पहनकर गाड़ियों की पार्किंग कराते दिखाई दे रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इसके बदले उन्हें प्रतिदिन लगभग 500 रुपये की दिहाड़ी मिलती है। पहली नजर में यह एक सामान्य नौकरी करने वाले युवक की तस्वीर लगती है, लेकिन हकीकत यह है कि वीरेंद्र राष्ट्रीय स्तर पर कई गोल्ड मेडल जीत चुके एक प्रतिभाशाली MMA फाइटर हैं।

पिथौरागढ़ के छोटे से गांव से शुरू हुआ संघर्ष

26 वर्षीय वीरेंद्र सिंह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के चिन्खाली गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता त्रिलोक सिंह सशस्त्र सीमा बल (SSB) में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा वीरेंद्र के खेल के सपने को आगे बढ़ाने की कोशिश की। बचपन से ही खेलों में रुचि रखने वाले वीरेंद्र ने पहले बॉक्सिंग में जिला और राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए कई गोल्ड मेडल अपने नाम किए। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय MMA फाइटर अंगद बिष्ट से प्रेरित होकर उन्होंने प्रोफेशनल MMA में अपना करियर बनाने का फैसला किया। वर्ष 2024 से वह देहरादून स्थित म्यूटेंट MMA एकेडमी में लगातार ट्रेनिंग कर रहे हैं।

MMA Fighter Virendra Singh Tomkyal :- गार्ड की नौकरी करने पर मजबूर उत्तराखंड का गोल्ड मेडलिस्ट MMA फाइटर !

हर महीने 20 हजार रुपये का खर्च बना सबसे बड़ी चुनौती

MMA जैसे खेल में सिर्फ मेहनत ही काफी नहीं होती, बल्कि बेहतर डाइट, जिम, सप्लीमेंट, ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अच्छी आर्थिक व्यवस्था भी जरूरी होती है। वीरेंद्र बताते हैं कि उनकी तैयारी पर हर महीने करीब 20 हजार रुपये का खर्च आता है। आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण उन्हें इस खर्च को पूरा करने के लिए शादी समारोहों में पार्किंग ड्यूटी करनी पड़ती है। पूरे दिन मेहनत करने के बाद भी वह अपनी ट्रेनिंग नहीं छोड़ते और हर दिन घंटों अभ्यास करते हैं ताकि अपने लक्ष्य से पीछे न हटें।

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वायरल वीडियो ने सामने लाई खिलाड़ी की असली कहानी

शादी समारोह में पार्किंग कराते हुए वीरेंद्र का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो देखने के बाद लोगों को पता चला कि एक राष्ट्रीय स्तर का गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी अपनी खेल यात्रा जारी रखने के लिए 500 रुपये की दिहाड़ी पर काम करने को मजबूर है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या देश और राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपने सपनों को जिंदा रखने के लिए इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना चाहिए। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर वीरेंद्र के जज्बे की सराहना की और उनके लिए बेहतर सहयोग की मांग भी उठाई।

कठिन परिस्थितियों में भी नहीं टूटा हौसला

आर्थिक परेशानियों के बावजूद वीरेंद्र सिंह का आत्मविश्वास आज भी मजबूत है। उनका कहना है कि वे किसी भी हाल में अपने सपने से पीछे नहीं हटेंगे। उनका लक्ष्य भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतना है। वीरेंद्र की कहानी यह साबित करती है कि सपने बड़े हों तो कठिनाइयां रास्ता जरूर रोकती हैं, लेकिन मजबूत इरादों के सामने हार मान लेती हैं। जरूरत सिर्फ इतनी है कि ऐसे खिलाड़ियों को समय पर सही सहयोग और अवसर मिल सके।

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वीरेंद्र सिंह की संघर्षभरी कहानी केवल एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उन हजारों प्रतिभाशाली युवाओं की हकीकत है जो आर्थिक अभाव के बावजूद अपने सपनों के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। ऐसे खिलाड़ियों को यदि उचित आर्थिक सहायता, प्रायोजन और बेहतर सुविधाएं मिलें तो वे देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर और ऊंचा कर सकते हैं।

Disclaimer :- यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और सोशल मीडिया पर सामने आई रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग की छवि को प्रभावित करना नहीं है। यदि संबंधित मामले में भविष्य में कोई आधिकारिक अपडेट या नई जानकारी सामने आती है, तो तथ्यों में बदलाव संभव है।

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