Rishikesh Minor Rape Case :- ऋषिकेश में 16 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के मामले ने अब और गंभीर रूप ले लिया है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद होटल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस के मुताबिक, नाबालिग को होटल में बिना उचित पहचान और सत्यापन के ठहराया गया था। इसके अलावा होटल के जरूरी रजिस्टर में भी उसकी एंट्री नहीं की गई थी।
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि घटना की जानकारी होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों या सहायता एजेंसी को सूचना नहीं दी गई। इतना ही नहीं, पुलिस के अनुसार नाबालिग को होटल से बाहर ले जाते समय CCTV कैमरों को बंद कर दिया गया था। इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने होटल मैनेजर वैभव गुप्ता और संचालक राहुल अग्रवाल को भी गिरफ्तार कर लिया है।
24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, 30 अगस्त 2026 को नाबालिग के पिता ने कोतवाली ऋषिकेश में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 29 अगस्त को मुजफ्फरनगर निवासी 21 वर्षीय सोफियान उनकी 16 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर ऋषिकेश के पुराने रेलवे स्टेशन के पास स्थित होटल गंगा इन में ले गया। आरोप है कि होटल में सोफियान ने नाबालिग के साथ मारपीट की और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद परिवार ने उसे उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर गठित टीम ने आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दी। बाद में मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने सोफियान को हरिद्वार में सिंहद्वार फ्लाईओवर के नीचे से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी की तलाशी के दौरान मोटोरोला कंपनी का एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। पुलिस का कहना है कि मोबाइल की जांच में घटना से संबंधित पीड़िता के फोटो और वीडियो भी मिले हैं। पुलिस ने इस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना है। मामले में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आगे की विवेचना की जा रही है।
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होटल मैनेजर और संचालक की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
मुख्य आरोपी से पूछताछ के बाद पुलिस ने होटल में नाबालिग के ठहरने से जुड़े रिकॉर्ड और परिस्थितियों की जांच की। इसी दौरान होटल प्रबंधन की भूमिका सामने आई। पुलिस के अनुसार, नाबालिग को होटल में ठहराते समय उचित पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जरूरी रजिस्टर में भी उसकी जानकारी दर्ज नहीं की गई। पुलिस का कहना है कि होटल प्रबंधन को घटना की जानकारी होने के बावजूद इसकी सूचना पुलिस या संबंधित सहायता एजेंसी को नहीं दी गई।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि नाबालिग को होटल से बाहर ले जाने के दौरान CCTV कैमरों को बंद किया गया था। इस घटनाक्रम ने पुलिस की जांच को होटल प्रबंधन की ओर मोड़ दिया। इसके बाद होटल मैनेजर वैभव गुप्ता और संचालक राहुल अग्रवाल को पूछताछ के लिए थाने लाया गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ और जांच में सामने आए तथ्यों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
मुकदमे में पॉक्सो एक्ट की अतिरिक्त धाराएं जोड़ी गईं
होटल प्रबंधन की कथित भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने मुकदमे में पॉक्सो एक्ट की कई अतिरिक्त धाराएं जोड़ी हैं। पुलिस के अनुसार, धारा 5/6/15/16/19/21 पॉक्सो एक्ट के साथ धारा 61(2)/238 बीएनएस की बढ़ोतरी की गई है। इस कार्रवाई के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या तीन हो गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि होटल में नाबालिग को बिना सत्यापन प्रवेश देने और CCTV बंद करने की पूरी प्रक्रिया में किस-किस की भूमिका थी।
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मामले में पुलिस ने केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। होटल के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने संबंधित होटल का लाइसेंस निरस्त कराने के लिए सराय एक्ट के तहत उप जिलाधिकारी, ऋषिकेश को रिपोर्ट भेजी है। अब प्रशासन की ओर से रिपोर्ट और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
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इस मामले की जांच में अब कई अहम सवाल सामने हैं। नाबालिग को होटल में बिना उचित पहचान और सत्यापन के कमरा कैसे दिया गया? होटल के जरूरी रजिस्टर में उसकी एंट्री क्यों नहीं की गई? होटल प्रबंधन को घटना की जानकारी कब हुई और इसके बावजूद पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी गई? सबसे अहम सवाल यह है कि नाबालिग को होटल से बाहर ले जाते समय CCTV कैमरे किसके निर्देश पर बंद किए गए? पुलिस इन सभी पहलुओं को जांच का हिस्सा बनाकर साक्ष्य जुटा रही है। मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस टीम ने की कार्रवाई
इस मामले की कार्रवाई प्रभारी निरीक्षक यशपाल सिंह बिष्ट के नेतृत्व में की गई। टीम में वरिष्ठ उपनिरीक्षक नवीन जोशी, उपनिरीक्षक विकसित पंवार, उपनिरीक्षक राजकुमार, उपनिरीक्षक निखलेश बिष्ट, महिला उपनिरीक्षक ज्योति शर्मा, हेड कांस्टेबल संदीप राठी, कांस्टेबल तेज सिंह और कांस्टेबल अभिषेक शामिल रहे।
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Disclaimer :- यह खबर पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और मामले में सामने आए आरोपों के आधार पर तैयार की गई है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में होने वाली कानूनी प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी। खबर में किसी आरोपी को दोषी ठहराने का उद्देश्य नहीं है। नाबालिग पीड़िता की पहचान से संबंधित किसी भी निजी जानकारी को जानबूझकर साझा नहीं किया गया है।




