उत्तराखंड की राजनीति और समाज एक बार फिर बेचैन है। अंकिता भंडारी केस में जैसे ही उर्मिला सनावर ने कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक किया, पूरे राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई। आम लोगों के मन में फिर वही सवाल उठने लगे हैं, क्या इस मामले में सच सामने आएगा या ताकतवरों को एक बार फिर बचा लिया जाएगा। यही बेचैनी अब सड़कों से लेकर राजनीतिक मंचों तक साफ दिखाई दे रही है।

उर्मिला सनावर के खुलासे के बाद कांग्रेस, यूकेडी समेत कई विपक्षी दलों ने भाजपा पर सीधा हमला बोला है। सभी की एक ही मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिस भी वीआईपी का नाम सामने आया है, उसे कानून के दायरे में लाया जाए। इसी बीच इस केस में समाजसेवी और रेप पीड़िताओं के लिए लगातार आवाज उठाने वाली Yogita Bhayana की एंट्री ने आंदोलन को और धार दे दी है।
देहरादून पहुंचकर योगिता भयाना ने साफ शब्दों में कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि इंसाफ और भरोसे का सवाल है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे केस की जांच सीबीआई से कराई जाए ताकि किसी भी तरह के दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप की गुंजाइश न रहे। योगिता ने यह भी कहा कि जब किसी गंभीर अपराध में किसी का नाम सामने आता है, तो कानून के मुताबिक पहले गिरफ्तारी होती है और फिर जांच आगे बढ़ती है।

प्रेस वार्ता के दौरान योगिता भयाना ने वंतारा रिसोर्ट प्रकरण का भी जिक्र किया। उन्होंने घटना के बाद बुलडोजर चलवाकर सबूत मिटाने के आरोप में यमकेश्वर से भाजपा विधायक Renu Bisht की गिरफ्तारी की मांग की। उनका कहना था कि अगर सरकार सच में न्याय चाहती है, तो उसे आगे आकर जनता को भरोसा देना होगा कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा।
योगिता भयाना ने यह भी कहा कि वीआईपी का नाम सामने आने के बाद सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने मांग की कि उर्मिला सनावर, जिन्होंने कथित वीआईपी का नाम उजागर किया है, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि वह किसी दबाव या खतरे में न रहें। योगिता के मुताबिक, सच बोलने वालों की हिफाजत करना सरकार की जिम्मेदारी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि Ankita Bhandari केस सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है। जनता की नजरें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इंसाफ के साथ खड़ी होती है या सियासी आरोप-प्रत्यारोप में मामला उलझकर रह जाता है।




