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अंकिता भंडारी केस ने पकड़ा नया तूल, वायरल ऑडियो के बाद बड़ी कार्रवाई

Ankita Bhandari Murder Case SIT Investigation

उत्तराखंड की राजनीति और समाज को झकझोर देने वाला अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार वजह बना है एक ऑडियो, जिसने सोशल मीडिया पर आते ही माहौल गरमा दिया। आम लोगों से लेकर सियासी गलियारों तक, हर जगह सवाल उठने लगे। जब किसी संवेदनशील मामले में बड़े नाम सामने आते हैं, तो बेचैनी स्वाभाविक होती है। यही वजह है कि इस पूरे विवाद ने एक बार फिर लोगों की भावनाओं को झकझोर दिया है। हाल ही में अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक ऑडियो ने नया बवंडर खड़ा कर दिया। इस ऑडियो में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी खलबली मच गई। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक यह मामला पहुंचा और सवाल उठने लगे कि आखिर सच्चाई क्या है और इसके पीछे की पूरी कहानी क्या है।

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उधर पूर्व विधायक सुरेश राठौर और सहारनपुर निवासी उर्मिला सनावर के बीच चल रहा पुराना विवाद अब कई थानों तक फैल चुका है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। इस खींचतान के चलते अलग-अलग जगहों पर कई प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं। फिलहाल उर्मिला सनावर के खिलाफ हरिद्वार जिले में चार मामले दर्ज हैं, जबकि एक रिपोर्ट देहरादून में भी दर्ज की गई है। वहीं, सुरेश राठौर पहले भी ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करा चुके हैं। मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया, जब संत शिरोमणि गुरु रविदास विश्व महापीठ के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने भी दोनों पर झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने का आरोप लगाया। इसके बाद बहादराबाद, झबरेड़ा और रानीपुर कोतवाली में भी रिपोर्ट दर्ज हुई। अलग-अलग थानों में दर्ज इन मामलों ने पुलिस प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।

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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हरिद्वार के एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने विशेष जांच दल यानी SIT के गठन का फैसला लिया। एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह की अगुवाई में सात सदस्यीय SIT बनाई गई है, जिसमें विभिन्न थानों के अनुभवी अधिकारी और सीआईयू के जवान शामिल किए गए हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस टीम का मकसद सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर जल्द से जल्द सच्चाई सामने लाना है, ताकि किसी भी निर्दोष को परेशान न होना पड़े और दोषी कानून से बच न सके।

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