Site icon Uttarakhand Update

लंबे समय से बीमार चल रहे पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी का निधन, प्रदेश में शोक की लहर !

Bhuvan Chandra Khanduri :- लंबे समय से चल रहे पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी का निधन, प्रदेश में शोक की लहर !

Bhuvan Chandra Khanduri :- उत्तराखंड की राजनीति से आज एक ऐसा नाम हमेशा के लिए विदा हो गया, जिसे लोग सख्त प्रशासन, साफ छवि और अनुशासन के लिए याद करते थे। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री Bhuvan Chandra Khanduri का आज निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे खंडूड़ी के निधन की खबर सामने आते ही पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। उनके आवास पर पिछले कई दिनों से नेताओं, समर्थकों और परिजनों का लगातार आना-जाना लगा हुआ था। उनके जाने से उत्तराखंड की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद वीकेंड पर 45 हजार से अधिक गाड़ियां पहुँची देहरादून, पुलिस की बढ़ी चुनौती !

सेना से राजनीति तक का प्रेरणादायक सफर

भुवन चंद्र खंडूड़ी का जीवन अनुशासन, ईमानदारी और सेवा का उदाहरण माना जाता है। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उन्हें राजनीति में लाने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee को दिया जाता है। वर्ष 1990 के दौर में जब भाजपा अपने विस्तार के रास्ते पर थी, तब वाजपेयी ने खंडूड़ी की कार्यशैली और ईमानदारी को पहचानते हुए उन्हें पार्टी में अहम जिम्मेदारी दी। भुवन चंद्र खंडूड़ी बहुत जल्दी भाजपा नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए। पहली बार लोकसभा पहुंचने के केवल दो साल बाद ही उन्हें पार्टी का मुख्य सचेतक बना दिया गया था। यह उस दौर में किसी भी नेता के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।

सड़क परिवहन मंत्री के रूप में बदली देश की तस्वीर

साल 1999 में Atal Bihari Vajpayee की सरकार में भुवन चंद्र खंडूड़ी को सड़क परिवहन मंत्री बनाया गया। यह वही समय था जब देश में बड़े पैमाने पर हाईवे और आधुनिक सड़कों का निर्माण शुरू हुआ। स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना को आगे बढ़ाने में उनका बड़ा योगदान माना जाता है। उनकी कार्यशैली बेहद सख्त और परिणाम देने वाली थी। कहा जाता है कि वाजपेयी ने उन्हें काम करने की पूरी स्वतंत्रता दी थी और यही वजह रही कि उस दौर में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। आज भी कई लोग उन्हें भारत के सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने वाले नेताओं में गिनते हैं।

उत्तराखंड में गर्मी का कहर, दून से मसूरी तक बढ़ी तपिश ने लोगों को किया बेहाल !

उत्तराखंड की राजनीति में मजबूत पहचान

उत्तराखंड बनने के बाद प्रदेश की राजनीति लगातार अस्थिरता और गुटबाजी से गुजर रही थी। ऐसे समय में भाजपा नेतृत्व ने साल 2007 में भुवन चंद्र खंडूड़ी को देहरादून भेजा और उन्हें प्रदेश की कमान सौंपी गई। 2007 से 2009 तक मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने प्रशासन में पारदर्शिता और अनुशासन लाने की कोशिश की। उनकी छवि एक सख्त और ईमानदार मुख्यमंत्री की बनी।

हालांकि बाद में पार्टी के भीतर राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा और सत्ता की जिम्मेदारी रमेश पोखरियाल निशंक को दे दी गई। लेकिन जब प्रदेश में भ्रष्टाचार के मुद्दे सामने आने लगे, तब भाजपा नेतृत्व को एक बार फिर खंडूड़ी की जरूरत महसूस हुई। इसके बाद वर्ष 2011 में उन्हें दोबारा उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया गया। अपने दूसरे कार्यकाल में भी उन्होंने साफ प्रशासन और कड़े फैसलों की छाप छोड़ी।

सादगी और ईमानदारी के लिए हमेशा याद किए जाएंगे

भुवन चंद्र खंडूड़ी उन नेताओं में शामिल थे जिनकी पहचान सत्ता से ज्यादा उनकी सादगी और ईमानदारी से होती थी। राजनीति में रहते हुए उन्होंने हमेशा अनुशासन और साफ छवि को प्राथमिकता दी। उत्तराखंड के लोग उन्हें एक ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में याद करते हैं जिसने सत्ता को सेवा का माध्यम माना। उनके निधन से केवल भाजपा ही नहीं बल्कि पूरे उत्तराखंड ने एक अनुभवी और सम्मानित नेता को खो दिया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है।

जनगणना ड्यूटी के दौरान शिक्षिका पर रॉटविलर का हमला, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल !

प्रदेश में शोक की लहर

खंडूड़ी के निधन की खबर के बाद उत्तराखंड में शोक का माहौल है। कई बड़े नेताओं और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है। उनके समर्थकों का कहना है कि राजनीति में ईमानदारी और अनुशासन की मिसाल के रूप में उनका नाम हमेशा लिया जाएगा। उनकी राजनीतिक यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। समय के साथ कुछ जानकारियों में बदलाव संभव है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी आधिकारिक पुष्टि के लिए विश्वसनीय स्रोतों की जांच अवश्य करें।

Exit mobile version