Bulldozer Action In Dehradun :- सुबह की हलचल में जब माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल छोड़ते हैं, तो मन में बस एक ही भरोसा होता है कि उनका बच्चा सुरक्षित हाथों में है। देहरादून से आई यह खबर उसी भरोसे को बचाने की कोशिश की कहानी है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जिला प्रशासन ने बच्चों की जान को खतरे में डाल रहे जर्जर स्कूल भवनों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। लंबे समय से उठ रही चिंताओं के बीच अब प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।
जिले में जब यह बात सामने आई कि कई स्कूल भवन अपनी उम्र और बदहाली के कारण कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं, तब माहौल गंभीर हो गया। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस मुद्दे को हल्के में लेने के बजाय तुरंत शिक्षा विभाग से रिपोर्ट तलब की। महज दस दिनों के भीतर आई सर्वे रिपोर्ट ने स्थिति की गंभीरता उजागर कर दी। जांच में 79 स्कूल पूरी तरह जर्जर पाए गए, जिनमें 66 प्राथमिक और 13 मिडिल स्कूल शामिल हैं। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए इन भवनों को हटाने का निर्णय लिया गया।
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प्रशासन की सख्ती यहीं नहीं रुकी। जर्जर स्कूलों के मामले में लापरवाही सामने आने पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तक की। इसका असर यह हुआ कि शिक्षा विभाग ने तेजी से जिले के खराब भवन वाले स्कूलों का विस्तृत सर्वे पूरा किया और रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी। इसी आधार पर अब देहरादून में जर्जर स्कूलों पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस अभियान के लिए एक करोड़ रुपये की राशि भी जारी कर दी गई है ताकि काम में कोई देरी न हो।
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इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि बच्चों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भी स्पष्ट निर्देश हैं कि सुरक्षा के नाम पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। इसी वजह से लोक निर्माण विभाग को तत्काल एस्टीमेट तैयार कर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से पूरी करने के आदेश दिए गए हैं। बजट की कमी को भी इस काम में आड़े नहीं आने दिया जाएगा।

सबसे राहत की बात यह है कि इस कार्रवाई के दौरान बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। प्रशासन ने पहले ही वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का फैसला लिया है। जिन 79 स्कूलों को तोड़ा जाना है, उनमें से 63 स्कूलों के बच्चों को पहले ही दूसरी सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया जा चुका है। बाकी बचे स्कूलों में भी वैकल्पिक इंतजाम तेजी से पूरे किए जा रहे हैं।
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इसके अलावा सर्वे में 17 स्कूल ऐसे पाए गए जो आंशिक रूप से जर्जर हैं, उनके लिए मरम्मत का रास्ता चुना गया है, जबकि 8 स्कूलों को ध्वस्तीकरण की सूची से बाहर रखा गया है। देहरादून का यह फैसला सिर्फ इमारतें गिराने की कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतीक है जहां बच्चों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा गया है। मजबूत इरादों और त्वरित कार्रवाई के साथ प्रशासन ने यह संदेश दे दिया है कि स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि भरोसे और सुरक्षा का प्रतीक भी होने चाहिए।
Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध जानकारी और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। समय के साथ प्रशासनिक निर्णयों और आंकड़ों में बदलाव संभव है। किसी भी अंतिम निष्कर्ष के लिए संबंधित विभाग की ताजा सूचना को प्राथमिकता दें।




