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देहरादून में अब एक और Toll Plaza पर टोल वसूली शुरू, स्थानीय लोग बना सकेंगे मंथली पास, जानिए पूरी डिटेल !

Dehradun Paonta Sahib Toll :- देहरादून में अब एक और Toll Plaza पर टोल वसूली शुरू, स्थानीय लोग बना सकेंगे मंथली पास, जानिए पूरी डिटेल !

Dehradun Paonta Sahib Toll :- सुबह की भागदौड़ में जब लोग अपने काम पर निकलते हैं, तब सबसे ज्यादा उम्मीद यही होती है कि रास्ता आसान हो और समय बचे। बल्लूपुर से देहरादून होते हुए पांवटा साहिब तक बन रहा फोरलेन अब लगभग पूरा होने जा रहा है और इसी के साथ धर्मावाला में बने टोल प्लाजा पर टोल वसूली भी शुरू कर दी गई है। बुधवार सुबह आठ बजे से जैसे ही टोल वसूली औपचारिक रूप से लागू हुई, इस पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बन गया। देहरादून से पांवटा साहिब की ओर जाने वाले और वहां से लौटने वाले सभी वाहनों को अब टोल भुगतान के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति दी जा रही है।

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टोल प्लाजा पर फास्टैग और नकद दोनों माध्यमों से शुल्क लिया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इससे यातायात व्यवस्था ज्यादा सुचारू रहेगी और जाम की समस्या कम होगी। इसी बीच स्थानीय लोगों के लिए एक राहत की खबर भी है। टोल प्लाजा प्रबंधन ने बीस किलोमीटर के दायरे में रहने वाले निवासियों के लिए मासिक पास की सुविधा देने का फैसला किया है। वाहन का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और आधार कार्ड दिखाकर यह पास बनवाया जा सकता है, जिससे रोजाना टोल देने की परेशानी से बचा जा सके।

हालांकि टोल वसूली शुरू होते ही कुछ स्थानीय वाहन चालक इससे बचने के लिए ग्रामीण रास्तों का इस्तेमाल करने लगे हैं। इससे आसपास के गांवों की सड़कों पर अचानक ट्रैफिक बढ़ गया है और लोग इसे लेकर भी अपनी चिंता जता रहे हैं। टोल प्लाजा पर भीड़ और अव्यवस्था न हो, इसके लिए पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है ताकि फोरलेन पर आवाजाही बिना रुकावट चलती रहे।

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फोरलेन और एलीवेटेड रोड को लेकर विरोध की आवाजें भी तेज होने लगी हैं। विकासनगर क्षेत्र में दिल्ली–यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर धर्मावाला से बाड़वाला तक प्रस्तावित चौड़ीकरण और एलीवेटेड रोड के खिलाफ 16 जनवरी को सत्याग्रह का ऐलान किया गया है। सुबह 11 बजे पहाड़ी गली चौक के पास होने वाले इस सत्याग्रह में स्थानीय व्यापारी और सामाजिक कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे। उनका कहना है कि इस परियोजना से क्षेत्र की सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक पहचान को नुकसान पहुंचेगा और छोटे व्यापारियों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा।

एक ओर जहां फोरलेन से सफर तेज और आरामदायक होने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर टोल और चौड़ीकरण को लेकर उठ रहे सवाल यह दिखाते हैं कि विकास और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन और जनता के बीच इस मुद्दे पर कैसी सहमति बनती है।

डिस्क्लेमर :- यह लेख उपलब्ध जानकारी और स्थानीय रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। समय के साथ नियमों, टोल दरों या प्रशासनिक निर्णयों में बदलाव संभव है। किसी भी यात्रा या निर्णय से पहले आधिकारिक सूचना की पुष्टि अवश्य करें।

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