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नफरती भाषण देने के मामले में 71भाषणों के साथ पहले स्थान पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी !

Hate Speech Data 2025 India :- नफरती भाषण देने के मामले में 71भाषणों के साथ पहले स्थान पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी !

Hate Speech Data 2025 India :- कभी-कभी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं। साल 2025 में सामने आए हेट स्पीच से जुड़े ताज़ा आंकड़े भी कुछ ऐसे ही हैं। ये आंकड़े सिर्फ भाषणों की गिनती नहीं हैं, बल्कि उस माहौल का आईना हैं जिसमें समाज सांस ले रहा है। जब शब्द ज़हर बन जाएं, तो उसका असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहता, वो आम लोगों के दिल और दिमाग तक पहुंचता है।

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हाल ही में जारी डेटा के मुताबिक, साल 2025 में सबसे ज़्यादा नफरती भाषण देने वालों की सूची में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शीर्ष पर रहे। रिपोर्ट के अनुसार, उनके नाम 71 ऐसे भाषण दर्ज किए गए, जिन्हें हेट स्पीच की श्रेणी में रखा गया। यह संख्या अपने आप में चौंकाने वाली है और कई सवाल खड़े करती है।

यह आंकड़ा इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि मुख्यमंत्री जैसे पद पर बैठे व्यक्ति से संयम, संतुलन और जिम्मेदारी की उम्मीद की जाती है। जब सत्ता में बैठे लोग तीखी और विभाजनकारी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो उसका सीधा असर समाज के ताने-बाने पर पड़ता है। शब्द जब आग बन जाते हैं, तो सबसे पहले भरोसा जलता है।

रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया कि हेट स्पीच देने वालों की सूची में कई बड़े और प्रभावशाली नेता शामिल हैं, लेकिन 71 भाषणों के साथ शीर्ष स्थान पर होना अपने आप में गंभीर संकेत है। यह बहस अब सिर्फ राजनीतिक विरोध या समर्थन तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि यह सवाल बन जाती है कि क्या हम एक ऐसे दौर में पहुंच रहे हैं जहां नफरत एक रणनीति बनती जा रही है।

सामान्य नागरिक के तौर पर यह सोचने की जरूरत है कि बार-बार सुनी जाने वाली नफरती भाषा हमारे बच्चों, युवाओं और आने वाली पीढ़ी को क्या संदेश दे रही है। राजनीति का मकसद जोड़ना होना चाहिए, तोड़ना नहीं। लेकिन जब आंकड़े इसके उलट कहानी कहते हैं, तो चिंता होना स्वाभाविक है।

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इस पूरे मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि हेट स्पीच को सिर्फ आंकड़ों तक सीमित न समझा जाए। यह एक सामाजिक बीमारी है, जो धीरे-धीरे सामान्य बातचीत का हिस्सा बनती जा रही है। अगर आज इस पर सवाल नहीं उठाए गए, तो कल इसकी कीमत समाज को चुकानी पड़ सकती है।

Disclaimer :- यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्ट्स और मीडिया में सामने आए आंकड़ों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय या राजनीतिक दल को बदनाम करना नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना है। पाठकों से अनुरोध है कि वे अपनी राय बनाते समय विभिन्न स्रोतों का अध्ययन करें।

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