Kedarnath Dham Mobile Ban :- जब इंसान पहाड़ों की ऊंचाइयों में बसे केदारनाथ मंदिर की ओर बढ़ता है, तो उसके दिल में सिर्फ एक भावना होती है, शांति और आस्था की. घंटियों की आवाज, ठंडी हवा और बर्फ से ढकी चोटियों के बीच भगवान के सामने खड़े होने का अनुभव शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है. लेकिन पिछले कुछ समय से यह आध्यात्मिक माहौल बदलता नजर आ रहा था. भक्ति की जगह कैमरे और मोबाइल स्क्रीन ने ले ली थी. इसी को देखते हुए इस बार प्रशासन और मंदिर समिति ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है.
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इस यात्रा सीजन में बाबा केदार के दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर के भीतर और परिसर में मोबाइल या कैमरा ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह कदम धाम की गरिमा बनाए रखने और हर भक्त को बिना रुकावट शांतिपूर्ण दर्शन कराने के लिए उठाया गया है. हर साल लाखों लोग यहां पहुंचते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में गर्भगृह और मंदिर परिसर की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे हैं. कई श्रद्धालु दर्शन से ज्यादा रील बनाने में व्यस्त दिखे, जिससे कतारों में देरी और अव्यवस्था बढ़ी.

इस बार प्रशासन पहले से ज्यादा सख्ती की तैयारी में है. जिला प्रशासन और श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने साफ कर दिया है कि नियम सिर्फ कागज पर नहीं रहेंगे, बल्कि जमीन पर लागू होंगे. अधिकारियों के मुताबिक अगर कोई श्रद्धालु चोरी-छिपे मोबाइल अंदर ले जाता है या मंदिर परिसर में वीडियो बनाते पकड़ा जाता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा. इस व्यवस्था का मकसद किसी को रोकना नहीं, बल्कि सबको सच्चे अर्थों में दर्शन का अनुभव देना है.
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समिति के पदाधिकारियों का मानना है कि जब हजारों लोग एक साथ भगवान के दर्शन के लिए खड़े होते हैं, तो अनुशासन ही सबसे बड़ी सेवा बन जाता है. कुछ लोगों की वजह से पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है. मोबाइल बैन से भीड़ प्रबंधन आसान होगा और मंदिर की आध्यात्मिक शांति बरकरार रहेगी. यह फैसला आस्था और सुशासन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. जो श्रद्धालु सच्चे मन से दर्शन करने आते हैं, उनके लिए यह फैसला राहत भरा भी हो सकता है. अब कोई फ्लैश, कोई सेल्फी की होड़ और कोई धक्का-मुक्की वाला माहौल नहीं होगा. सिर्फ श्रद्धा, मंत्रों की ध्वनि और भगवान के सान्निध्य का शांत अनुभव.




