Mohkampur Aasharodi Elevated Road :- देहरादून में रहने वाले कई परिवारों की चिंता इन दिनों बढ़ गई है। मोहकमपुर से आशारोड़ी तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के निर्माण की योजना को लेकर क्षेत्रवासियों ने विरोध शुरू कर दिया है। लोगों को आशंका है कि सड़क निर्माण के लिए किए जा रहे बदलावों के कारण उनके वर्षों की मेहनत से बनाए गए घर और जमीन प्रभावित हो सकते हैं। इसी चिंता को लेकर मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार से योजना पर दोबारा विचार करने की मांग उठाई है।
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क्षेत्रवासियों का कहना है कि विकास के लिए सड़कें और बेहतर यातायात व्यवस्था जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ उन परिवारों की परेशानियों को भी समझना चाहिए, जिनके घर इस परियोजना की चपेट में आने की आशंका है। प्रदर्शनकारियों ने प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान किए बिना योजना को आगे बढ़ाने पर सवाल उठाए हैं।
मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड को लेकर क्यों बढ़ा विरोध?
मोहकमपुर से आशारोड़ी के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-07 पर एलिवेटेड रोड और हाईवे चौड़ीकरण की प्रस्तावित योजना को लेकर विवाद सामने आया है। मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति के अनुसार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 7 अगस्त 2026 की अधिसूचना और भारत सरकार के राजपत्र संख्या 4205 में इस परियोजना से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
समिति का कहना है कि योजना में बदलाव के चलते अब कई आवासीय इलाकों के प्रभावित होने की आशंका है। इसी मुद्दे को लेकर क्षेत्रवासी विधानसभा के पास धरने पर बैठे और संबंधित अधिकारियों से परियोजना के प्रस्तावित स्वरूप की समीक्षा करने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि किसी भी बड़ी सड़क परियोजना को लागू करते समय स्थानीय निवासियों की समस्याओं, उनके घरों और जमीन पर पड़ने वाले प्रभाव को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
रेलवे फाटक से कई बस्तियों तक पहुंच सकता है निर्माण का असर
संघर्ष समिति के मुताबिक, प्रस्तावित एलिवेटेड रोड का मार्ग मोहकमपुर से भारतीय रेलवे संस्थान (आईआरआईपीओ) के पीछे होते हुए मोहकमपुर रेलवे फाटक के आसपास से निकाले जाने की योजना से जुड़ा है। समिति ने आशंका जताई है कि इस मार्ग के कारण आसपास की कई बस्तियां और आवासीय क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। इनमें मोहकमपुर बस्ती, कंपनी बाग, योगीवाला फाटक, बीरपुर-पंजाबला, फ्रेंड्स एन्क्लेव कॉलोनी और फ्रेंड्स कॉलोनी सहित रिस्पना नदी के बाद बाईं ओर स्थित रेलवे कॉलोनी तथा आसपास के अन्य इलाके शामिल बताए गए हैं। समिति के अनुसार, प्रस्तावित मार्ग को सॉलिटेयर होटल के पास अजाबपुर फ्लाईओवर से जोड़ने की योजना है।
समिति का दावा है कि इस परियोजना से हजारों मकान, जमीन और परिवार प्रभावित हो सकते हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि संबंधित इलाकों में कुछ भवनों पर एनएचएआई की ओर से निशान लगाए जाने के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है। हालांकि, वास्तव में कितने भवन प्रभावित होंगे, इसकी आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जानकारी सामने आना जरूरी है।
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पहले की योजना में बदलाव का भी लगाया आरोप
मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति ने परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पहले एलिवेटेड रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग के मुख्य मार्ग के ऊपर से निकालने की योजना थी, लेकिन बाद में इसमें बदलाव कर दिया गया। समिति का दावा है कि अब प्रस्तावित मार्ग आवासीय इलाकों की ओर बढ़ रहा है, जिससे बड़ी संख्या में स्थानीय परिवारों के सामने घर और जमीन प्रभावित होने की चिंता खड़ी हो गई है।
समिति ने अपने पत्र में वर्ष 2004-05 में इसी क्षेत्र में सड़क निर्माण को लेकर मकानों पर लाल निशान लगाए जाने का भी उल्लेख किया है। समिति के अनुसार, उस समय स्थानीय लोगों के विरोध के बाद परियोजना को वापस लेना पड़ा था। फिलहाल, इन आरोपों और पहले की योजना से संबंधित दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि परियोजना के पुराने और नए स्वरूप की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि लोगों को स्पष्ट हो सके कि प्रस्तावित निर्माण से उनके घरों पर कितना असर पड़ सकता है।
बिना पूर्व सूचना मकानों पर लाल निशान लगाने का आरोप
स्थानीय लोगों की नाराजगी की एक बड़ी वजह मकानों पर निशान लगाए जाने की प्रक्रिया भी है। संघर्ष समिति का आरोप है कि क्षेत्रवासियों को परियोजना की जानकारी पहले से पर्याप्त रूप से नहीं दी गई थी। लोगों को इसके बारे में तब पता चला, जब संबंधित भवनों पर निशान लगाए जाने लगे। समिति का कहना है कि प्रभावित होने की आशंका वाले परिवारों को समय रहते सूचना दी जानी चाहिए थी, ताकि वे योजना को समझ सकें और अपनी आपत्तियां संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकें।
क्षेत्रवासियों के लिए यह केवल सड़क निर्माण का मामला नहीं है। कई परिवारों ने वर्षों की कमाई और मेहनत से अपने घर बनाए हैं। ऐसे में घर के प्रभावित होने की आशंका भी उनके लिए आर्थिक और भावनात्मक चिंता का कारण बन रही है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि मकानों पर निशान लगाने, निर्माण की सीमा तय करने और संभावित प्रभावित परिवारों की पहचान से जुड़ी जानकारी स्पष्ट की जाए। साथ ही, लोगों को अपनी बात रखने का उचित अवसर दिया जाए।
घरों को लेकर चिंतित परिवारों ने उठाया जीवन के अधिकार का मुद्दा
धरने पर बैठे क्षेत्रवासियों का कहना है कि घर किसी भी परिवार के लिए केवल रहने की जगह नहीं होता, बल्कि उसकी जमा-पूंजी, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा होता है। यदि वर्षों से बसे परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़े, तो उनके सामने रहने की नई व्यवस्था करने और आर्थिक नुकसान से निपटने जैसी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
इसी संदर्भ में संघर्ष समिति ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख किया है। समिति का कहना है कि विकास योजनाओं में नागरिकों के आवास और जीवन से जुड़े हितों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। हालांकि, किसी परियोजना के तहत जमीन या भवन प्रभावित होने की स्थिति में संबंधित कानूनी प्रक्रिया, लागू नियमों और उपलब्ध राहत या मुआवजे की जानकारी आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकती है।
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संघर्ष समिति ने सरकार से की पुनर्विचार की मांग
मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति के मुख्य संयोजक सुशील कुमार ने परियोजना से प्रभावित होने की आशंका वाले परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने की मांग की है। समिति चाहती है कि प्रस्तावित एलिवेटेड रोड की योजना पर दोबारा विचार किया जाए और स्थानीय निवासियों की आपत्तियों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाए।
समिति की ओर से जारी पत्र के अनुसार, धरना-प्रदर्शन में सुशील कुमार, टीएस नेगी, धीरज सिंह रावत, पीके भटनागर, मुकेश कुमार शर्मा, राकेश पुरोहित, संतराम जायसवाल, एसएन चौहान, ऊषा पडवाल, प्रशांत कुमार, महेंद्र, सुरेश बहुगुणा, त्रिभुवन सिंह, पूनम कुकरेती, राजेंद्र प्रसाद, अर्जुन सिंह और बलराम प्रजापति सहित अन्य लोग मौजूद रहे। समिति के पदाधिकारियों में मुख्य संयोजक सुशील कुमार, कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार भटनागर और सह-संयोजक मुकेश कुमार शर्मा के नाम शामिल हैं।
मोहकमपुर से आशारोड़ी तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड को लेकर क्षेत्रवासियों की मुख्य मांग है कि परियोजना से संभावित रूप से प्रभावित मकानों और परिवारों की स्थिति स्पष्ट की जाए। इसके साथ ही, निर्माण का पूरा नक्शा, प्रभावित होने वाले भवनों की जानकारी और लोगों की आपत्तियों पर कार्रवाई की स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। इस मामले में आगे की स्थिति संबंधित विभागों के आधिकारिक स्पष्टीकरण और परियोजना के दस्तावेजों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, क्षेत्रवासियों की चिंता और संघर्ष समिति का विरोध इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि विकास कार्यों के साथ स्थानीय लोगों के हितों और उनकी समस्याओं पर विचार करना भी जरूरी है।
डिस्क्लेमर :- यह समाचार उपलब्ध कराई गई जानकारी और संघर्ष समिति की ओर से लगाए गए आरोपों एवं दावों पर आधारित है। परियोजना के संभावित प्रभाव, मकानों की संख्या, मार्ग में बदलाव और पूर्व सूचना से संबंधित सभी दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस लेख में नहीं की गई है। नवीनतम एवं प्रमाणित जानकारी के लिए संबंधित सरकारी विभागों और आधिकारिक अधिसूचनाओं को देखें।

