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नंदा देवी राजजात पर सस्पेंस बरकरार, 2027 का ऐलान और 2026 की तैयारी ने बढ़ाई हलचल !

Nanda Devi Raj Jat :- नंदा देवी राजजात पर सस्पेंस बरकरार, 2027 का ऐलान और 2026 की तैयारी ने बढ़ाई हलचल

Nanda Devi Raj Jat :- उत्तराखंड की आस्था, परंपरा और लोक विश्वास से जुड़ी नंदा देवी राजजात एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था, भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। लेकिन इस बार राजजात को लेकर सहमति नहीं, बल्कि मतभेद सामने आए हैं। नंदा देवी मंदिर कुरुड़ के हक-हकूकधारियों और नंदा देवी राजजात समिति के बीच आयोजन की तिथि को लेकर एक राय नहीं बन पाई है, जिससे श्रद्धालुओं के मन में भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।

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नंदा देवी राजजात समिति ने साफ कर दिया है कि राजजात का आयोजन वर्ष 2027 में ही किया जाएगा। समिति का कहना है कि अगले वर्ष वसंत पंचमी के दिन राजजात का दिनपट्टा जारी किया जाएगा, जैसा कि परंपरा रही है। वसंत पंचमी पर कर्णप्रयाग के नौटी स्थित नंदा देवी मंदिर में मनौती यानी उच्याणा पूजन के बाद पंचांग के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि इस वर्ष राजजात का आयोजन संभव नहीं है।

पं. एस. कोठियाल के अनुसार पंचांग गणना में यात्रा की पूर्णता की तिथि 19 सितंबर तक जा रही है। राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने बताया कि वर्ष 2014 में यात्रा चार सितंबर को समाप्त हो गई थी, लेकिन इस बार मलमास यानी अधिमास के कारण तिथियां लगभग पंद्रह दिन आगे खिसक गई हैं। इसी वजह से इस वर्ष राजजात का आयोजन करना परंपराओं के अनुरूप नहीं माना गया। समिति के महामंत्री भुवन नौटियाल ने भी इस निर्णय से सहमति जताई है। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने भरोसा दिलाया है कि जब भी अगली राजजात होगी, प्रशासन की ओर से पूरा सहयोग दिया जाएगा।

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दूसरी ओर, नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ में आस्था का स्वर कुछ अलग ही सुनाई दे रहा है। कुरुड़ की बड़ी नंदा जात आयोजन समिति ने इसी वर्ष पांच सितंबर से बड़ी नंदा जात निकालने की घोषणा कर दी है। यह यात्रा नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ से शुरू होकर 20 सितंबर को पवित्र होमकुंड में पूर्ण होगी। समिति ने इसका कैलेंडर भी जारी कर दिया है, जिससे साफ हो गया है कि कुरुड़ के हक-हकूकधारी किसी भी हाल में परंपरा को रुकने देने के मूड में नहीं हैं।

पंचांग पूजा के दौरान गौड़ ब्राह्मणों ने भी इसी वर्ष बड़ी जात के आयोजन की घोषणा की और नंदा देवी के पश्वा ने भी इस पर सहमति जताई। बड़ी नंदा जात आयोजन समिति के अध्यक्ष हरेंद्र सिंह रावत और खड़कधारी थोकदार वीरेंद्र सिंह रावत की मौजूदगी में यह फैसला लिया गया। कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला का कहना है कि बड़ी नंदा जात आस्था और परंपरा से जुड़ा विषय है, जिसे किसी भी परिस्थिति में रोका नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि देव डोलियों का रूट मैप तैयार कर लिया गया है और उसी के अनुसार डोलियां होमकुंड तक जाएंगी।

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एक ओर प्रशासनिक, पंचांग और परंपरागत गणनाओं के आधार पर 2027 में राजजात की बात कही जा रही है, तो दूसरी ओर कुरुड़ में इसी वर्ष बड़ी नंदा जात की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यह टकराव सिर्फ तिथियों का नहीं, बल्कि भावनाओं, आस्था और परंपरा की अलग-अलग व्याख्याओं का भी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मतभेद का समाधान किस तरह निकलता है और श्रद्धालुओं की आस्था को किस रूप में संतुलन मिलता है।

Disclaimer:- यह लेख उपलब्ध जानकारी और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। आयोजन की तिथियों, परंपराओं या निर्णयों में समय के साथ परिवर्तन संभव है। किसी भी धार्मिक यात्रा में शामिल होने से पहले संबंधित समिति या प्रशासन से आधिकारिक जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

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