New Rules For Scooty And Gear Bike Licenses :- अगर आप बाइक या स्कूटी चलाते हैं, तो आपके लिए यह खबर बेहद जरूरी है। वाहन चलाने के साथ-साथ अब ड्राइविंग लाइसेंस की सही श्रेणी और वाहन का बीमा भी पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। नए नियमों के तहत अलग-अलग श्रेणी के दोपहिया वाहनों को चलाने के लिए लाइसेंस में संबंधित श्रेणी का उल्लेख होना जरूरी होगा। इसका मतलब है कि अगर आपके पास सिर्फ गियर वाली मोटरसाइकिल चलाने का लाइसेंस है, तो उसके आधार पर आप बिना गियर वाली स्कूटी या इसी तरह के दोपहिया वाहन नहीं चला सकेंगे। इसके लिए लाइसेंस में बिना गियर वाले दोपहिया वाहन की श्रेणी भी दर्ज करानी होगी।
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गियर वाली बाइक के लाइसेंस से नहीं चला सकेंगे स्कूटी
नए प्रावधान के अनुसार ड्राइविंग लाइसेंस में वाहन की संबंधित श्रेणी का उल्लेख होना जरूरी किया गया है। अगर किसी व्यक्ति के पास गियर वाली मोटरसाइकिल का लाइसेंस है, लेकिन लाइसेंस में बिना गियर वाले दोपहिया वाहन की श्रेणी दर्ज नहीं है, तो वह केवल उस लाइसेंस के आधार पर स्कूटी नहीं चला पाएगा। जिन वाहन चालकों का पहले से गियर वाली मोटरसाइकिल का लाइसेंस बना हुआ है और वे स्कूटी या बिना गियर वाला दोपहिया वाहन भी चलाते हैं, उन्हें अपने लाइसेंस में संबंधित श्रेणी जुड़वानी होगी। इससे वाहन चालक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह जिस तरह का वाहन चला रहा है, उसके लिए लाइसेंस पर सही श्रेणी मौजूद हो।
ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि खत्म होने पर भी 30 दिन की राहत
नए बदलावों में ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता को लेकर भी राहत दी गई है। लाइसेंस की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी इसे 30 दिन तक वैध माना जाएगा। इस दौरान लाइसेंस धारक को उसका नवीनीकरण कराना होगा। यह बदलाव उन लोगों के लिए राहत देने वाला है जो किसी कारण से लाइसेंस की वैधता समाप्त होने से पहले उसका नवीनीकरण नहीं करा पाते हैं। हालांकि, वाहन चालकों के लिए बेहतर यही रहेगा कि वे लाइसेंस की अवधि खत्म होने का इंतजार न करें और समय रहते इसे रिन्यू करा लें।
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अब प्रदेश में कहीं से भी करा सकेंगे वाहन का रजिस्ट्रेशन
वाहन रजिस्ट्रेशन को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब व्यक्ति पूरे प्रदेश में अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी स्थान से वाहन का रजिस्ट्रेशन करा सकेगा। पहले वाहन का पंजीकरण आम तौर पर उसी संभाग या उपसंभाग में कराया जाता था, जहां संबंधित व्यक्ति रहता था। नए नियम के बाद इस प्रक्रिया में ज्यादा सुविधा मिलने की उम्मीद है। इसी तरह अब व्यक्ति प्रदेश के किसी भी आरटीओ कार्यालय से ड्राइविंग लाइसेंस बनवा सकता है, भले ही उसका निवास किसी दूसरे जिले में हो। इस बदलाव से उन लोगों को खास तौर पर सुविधा मिल सकती है जिन्हें काम, पढ़ाई या अन्य कारणों से अपने मूल जिले से बाहर रहना पड़ता है।
बिना बीमा वाहन चलाना पड़ेगा महंगा
वाहन का बीमा नहीं कराना अब वाहन मालिक की जेब पर भारी पड़ सकता है। नए प्रावधानों में बिना बीमा वाहन चलाने पर आर्थिक दंड को बढ़ाया गया है। पहली बार बिना बीमा वाहन के पकड़े जाने पर बीमा के बेस प्रीमियम का तीन गुना या 5,000 रुपये, जो भी राशि अधिक होगी, वसूल की जाएगी। यानी सिर्फ जुर्माने से बचने के लिए वाहन का बीमा टालना अब महंगा पड़ सकता है। वाहन मालिकों के लिए जरूरी है कि वे अपने वाहन की बीमा पॉलिसी की वैधता समय-समय पर जांचते रहें।
दूसरी बार पकड़े जाने पर और बढ़ेगा जुर्माना
अगर कोई वाहन चालक दूसरी बार बिना बीमा वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके लिए आर्थिक दंड और ज्यादा हो जाएगा। ऐसी स्थिति में बीमा के बेस प्रीमियम का पांच गुना या 10,000 रुपये, जो भी अधिक होगा, वसूला जाएगा। खास बात यह है कि नए बदलाव में बिना बीमा वाहन चलाने के मामले में जेल की सजा का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। हालांकि, आर्थिक दंड को बढ़ाकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि वाहन मालिक अपने वाहन का वैध बीमा बनाए रखें।
जन विश्वास अधिनियम के तहत बदले मोटर वाहन से जुड़े प्रावधान
प्रदेश में जन विश्वास अधिनियम लागू होने के बाद मोटर यान अधिनियम से जुड़े कई प्रावधानों में बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य कई दंडात्मक प्रावधानों को सरल करना और कुछ मामलों में आर्थिक दंड को संशोधित करना है। ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर वाहन रजिस्ट्रेशन और बीमा तक किए गए बदलाव सीधे आम वाहन चालकों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए वाहन चलाने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि वे अपने लाइसेंस में दर्ज श्रेणी, लाइसेंस की वैधता और वाहन बीमा की स्थिति की जानकारी रखें।
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नए नियमों के बाद वाहन चलाते समय केवल लाइसेंस होना ही पर्याप्त नहीं माना जाएगा, बल्कि यह भी देखना जरूरी होगा कि लाइसेंस में संबंधित वाहन की श्रेणी दर्ज है या नहीं। अगर आप बाइक के साथ स्कूटी भी चलाते हैं, तो अपने लाइसेंस में दोनों की पात्रता सुनिश्चित करना जरूरी होगा। इसके साथ ही वाहन का बीमा समय पर रिन्यू कराना भी बेहद जरूरी है। बीमा समाप्त होने के बाद वाहन चलाने पर आर्थिक दंड काफी ज्यादा हो सकता है। इसी तरह लाइसेंस की वैधता समाप्त होने पर मिली 30 दिन की अवधि को भी केवल राहत के तौर पर देखा जाना चाहिए और नवीनीकरण जल्द करा लेना बेहतर रहेगा।
Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध जानकारी और बताए गए नए मोटर वाहन प्रावधानों के आधार पर तैयार किया गया है। नियमों की व्याख्या और उनके लागू होने की प्रक्रिया में समय के साथ बदलाव संभव है। वाहन चालक किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित आरटीओ या परिवहन विभाग से नवीनतम और आधिकारिक जानकारी जरूर प्राप्त करें।

