ठंडी शाम, रोशनी से सजा पंडाल और सामने बैठे सैकड़ों चेहरे, जो सिर्फ संगीत महसूस करने आए थे। नैनीताल में आयोजित विंटर कार्निवाल की यह रात कुछ खास बनने वाली थी, और जैसे ही मंच पर Pandavaas Band ने कदम रखा, माहौल खुद ही बोलने लगा। सुरों की पहली थाप के साथ ही दर्शकों को समझ आ गया कि यह सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी से जुड़ने का एक एहसास है। जिला प्रशासन और जिला पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित इस विंटर कार्निवाल की स्टार नाइट पूरी तरह पांडवाज़ बैंड के नाम रही। लोक संगीत की मिठास जब आधुनिक बीट्स से मिली, तो पूरा पंडाल तालियों और उत्साह से गूंज उठा। पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों ने मंच पर आते ही कुमाऊं और गढ़वाल की सांस्कृतिक खुशबू बिखेर दी।

बैंड के सदस्य ईशान, अनिरुद्ध, श्रेठ, राकेश, अंशुल, दीपक, ख्याति, श्रुति काला, शिवानी, गौरव और सुशांत ने एक के बाद एक ऐसे गीत पेश किए, जिनसे दर्शक खुद को रोक नहीं पाए। समलौण, घुघूती बसुती, फुलारी, बडुली, जन्दौली रुंदै, राधा, गाजणा, नंदा तेरो डोला, गणपति देवा, रंगीलो फागुन जैसे गीतों ने लोगों को अपने गांव, अपनी जड़ों और बचपन की यादों में लौटा दिया। हर गीत पर लोग झूमते, गुनगुनाते और तालियों से कलाकारों का हौसला बढ़ाते नजर आए। पांडवाज़ बैंड के लोकप्रिय गीत तिलगा, वीण तैं पाते ना, उत्तराखंड, राम गंगा और हुराणी ने माहौल को और भी भावुक बना दिया। ऐसा लग रहा था जैसे संगीत केवल कानों तक नहीं, सीधे दिल तक पहुंच रहा हो। यही पांडवाज़ की सबसे बड़ी ताकत है, लोक संगीत को आज की पीढ़ी से इस तरह जोड़ देना कि हर उम्र का श्रोता खुद को उसमें शामिल महसूस करे।

इस संगीतमय रात से पहले सर्वश्रेष्ठ डांसर एंड सिंगर ऑफ नैनीताल प्रतियोगिता ने मंच को युवा प्रतिभाओं से रोशन किया। इसके बाद उत्तराखंड के लोक गायक Kishan Mahipal ने जिया कोरी कोरी जैसे गीतों से श्रोताओं का दिल जीत लिया। स्वाति भट्ट और पुष्कर महर की कुमाऊंनी और गढ़वाली प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को खूब झुमाया। हिमनाद और टीम श्रेय खन्ना की प्रस्तुति ने पूरे कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी, जबकि स्थानीय कलाकारों के सांस्कृतिक गीत और नृत्य ने आयोजन को और भी खास बना दिया। पूरे कार्यक्रम का संचालन हेमंत बिष्ट और नवीन पांडे ने बेहद सहज और प्रभावशाली अंदाज में किया, जिससे दर्शक हर पल कार्यक्रम से जुड़े रहे। कुल मिलाकर, नैनीताल का यह विंटर कार्निवाल सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, संगीत और सामूहिक खुशी का उत्सव बन गया।




