Uttarakhand Chamoli Forest Fire :- उत्तराखंड के पहाड़ इन दिनों खामोशी से एक बड़ी पीड़ा झेल रहे हैं। चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध Valley of Flowers से सटे जंगलों में लगी आग धीरे-धीरे विकराल रूप ले चुकी है। यह आग सिर्फ पेड़ों को नहीं जला रही, बल्कि प्रकृति की उस नाजुक विरासत को भी खतरे में डाल रही है, जिस पर पूरी दुनिया गर्व करती है। हालात इसलिए और गंभीर हो गए हैं क्योंकि आग जिस इलाके में फैली है, वह बेहद ऊंचाई पर और लगभग पहुंच से बाहर है।
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क्यों बेकाबू होती जा रही है जंगल की आग
इस बार उत्तराखंड में मौसम ने भी साथ नहीं दिया। नवंबर और दिसंबर 2025 बिना बारिश के निकल गए और जनवरी 2026 के तेरह दिन बीत जाने के बाद भी बारिश या बर्फबारी नहीं हुई। सूखे जंगल, तेज ठंड और हवा ने आग को फैलने का पूरा मौका दे दिया। राज्य में अब तक कई जगहों पर आग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। चमोली के पुलना और भ्यूंडार गांव के सामने की पहाड़ियों में 9 जनवरी से सुलगती आग अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।

जब जमीन से पहुंच नामुमकिन हो गई
जिस क्षेत्र में आग लगी है, वहां तक पैदल पहुंचना लगभग असंभव है। खड़ी चट्टानें, सीधे पहाड़ और नीचे गिरते पत्थर हर कदम को जानलेवा बना रहे हैं। एसडीआरएफ और वन विभाग की टीमें पूरी कोशिश के बावजूद ऊपरी हिस्सों तक नहीं पहुंच पाईं। भीषण ठंड ने हालात और खराब कर दिए हैं। रास्ते में पड़ने वाले झरने जम चुके हैं, चट्टानों पर बर्फ की परत जम गई है और जरा सी चूक जान पर भारी पड़ सकती है। इन्हीं हालातों के चलते टीमों को कई बार वापस लौटना पड़ा।
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ग्रामीण भी मजबूर, जोखिम लेने से इनकार
वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों और महिला मंगल दल से सहयोग की अपील की, लेकिन आग वाले स्थान की भयावह स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने साफ कहा कि वहां जाना सीधे मौत को न्योता देने जैसा है। यह फैसला डर नहीं, बल्कि हकीकत पर आधारित था। इतनी खड़ी और अस्थिर पहाड़ियों पर किसी भी तरह का सामूहिक प्रयास संभव नहीं दिखा।

ड्रोन से निगरानी, हेलीकॉप्टर बना आखिरी उम्मीद
जमीनी स्तर पर पहुंच असंभव देख प्रशासन ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। ड्रोन सर्वे के जरिए आग के फैलाव पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल ऊंचाइयों पर धुआं उठता दिख रहा है, जो इस बात का संकेत है कि जंगल भीतर ही भीतर सुलग रहा है। अधिकारियों का मानना है कि अगर आग ने दोबारा तेज रफ्तार पकड़ी तो उसे रोकने का एकमात्र रास्ता हवाई कार्रवाई ही होगा।
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वायुसेना से मदद की तैयारी
आग की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन विभाग को पत्र लिखकर वायुसेना की मदद मांगी है। योजना यह है कि हेलीकॉप्टर के जरिए ऊंचाई वाले इलाकों में पानी या अन्य संसाधनों का छिड़काव किया जाए। साथ ही पहले एक हवाई सर्वे कर पूरे प्रभावित क्षेत्र का आकलन किया जाएगा ताकि आग बुझाने की रणनीति प्रभावी हो सके। सेना और प्रशासन लगातार संपर्क में हैं और हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

प्रकृति के लिए समय पर कदम जरूरी
फूलों की घाटी के आसपास फैली यह आग सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं है। यह उस चेतावनी की तरह है, जो बार-बार हमें याद दिलाती है कि बदलता मौसम और लापरवाही मिलकर किस तरह प्रकृति को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर आने वाले वर्षों तक दिख सकता है।




