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लोकगायिका हेमा नेगी करासी समेत उत्तराखंड की 6 प्रतिभाओं को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान !

Uttarakhand Sangeet Natak Akademi Award :- लोकगायिका हेमा नेगी करासी समेत उत्तराखंड की 6 प्रतिभाओं को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान !

Uttarakhand Sangeet Natak Akademi Award :- उत्तराखंड के लिए यह बेहद गर्व और खुशी का क्षण है। राज्य की लोकसंस्कृति, संगीत और कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली छह प्रतिभाओं का चयन प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए किया गया है। इन कलाकारों ने अपने समर्पण, मेहनत और प्रतिभा के बल पर न केवल उत्तराखंड का नाम रोशन किया है, बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान भी बनाई है। हाल ही में संगीत नाटक अकादमी द्वारा वर्ष 2024 और 2025 के लिए अकादमी फेलोशिप और पुरस्कारों की घोषणा की गई।

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इस दौरान संगीत, नृत्य, रंगमंच और लोक कलाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 108 कलाकारों को सम्मानित करने के लिए चुना गया है। इनमें उत्तराखंड की छह प्रतिभाओं का चयन राज्य के लिए विशेष उपलब्धि माना जा रहा है। लोकगायिका हेमा नेगी करासी को लोक संगीत के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2025 के लिए चुना गया है। वहीं उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार 202425 के तहत नम्रता राय, हिमांशु दरमोड़ा, निर्मल कुमार, मुकेश कुमार और अंजली को सम्मानित किया जाएगा। इन सभी कलाकारों ने वर्षों से कला और संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।

लोकसंस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचा रहीं हेमा नेगी करासी

रुद्रप्रयाग जिले के टुखिंडा गांव की रहने वाली लोकगायिका हेमा नेगी करासी उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी हैं। उन्होंने अब तक 100 से अधिक गीतों को अपनी आवाज दी है और कई लोकप्रिय एलबम में भी काम किया है। बचपन से ही मांगल, जागर और पारंपरिक लोकगीतों के प्रति उनका विशेष लगाव रहा।

अपनी मधुर आवाज और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के माध्यम से उन्होंने उत्तराखंड के देवी-देवताओं के जागरों को देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक पहुंचाया है। हेमा नेगी की एक खास पहचान यह भी है कि वे हर मंच पर पारंपरिक उत्तराखंडी वेशभूषा में ही प्रस्तुति देती हैं। उनका मानना है कि संस्कृति की असली पहचान उसकी परंपराओं से होती है और उन्हें सहेजना हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है।

नई पीढ़ी को कला से जोड़ रहे हिमांशु दरमोड़ा

रुद्रप्रयाग के मूल निवासी हिमांशु दरमोड़ा वर्तमान में देहरादून में रहकर भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पत्रकारिता और संगीत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले हिमांशु ने वर्ष 2016 में “कलाश्रय” संस्था की स्थापना की। इस संस्था के माध्यम से वे युवा कलाकारों को मंच प्रदान कर रहे हैं और उन्हें कला-संस्कृति के विभिन्न आयामों से जोड़ रहे हैं। उत्तराखंड की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित निनाद हिमालयन सांस्कृतिक उत्सव में भी उन्होंने महत्वपूर्ण समन्वयक की भूमिका निभाई थी। उनके प्रयासों से हिमालयी राज्यों की समृद्ध कला और संस्कृति को राष्ट्रीय मंच मिला।

कथक के माध्यम से भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ा रहीं नम्रता राय

देहरादून की रहने वाली नम्रता राय पिछले 27 वर्षों से शास्त्रीय नृत्य कथक की साधना कर रही हैं। वे लखनऊ घराने की प्रतिष्ठित कलाकार हैं और दूरदर्शन की ग्रेडेड कलाकार के रूप में भी अपनी पहचान रखती हैं। देश और विदेश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी नम्रता राय की चर्चित प्रस्तुति “गीता गोविंदा – द म्यूजिकल” जी-20 कार्यक्रम का भी हिस्सा रही थी। उन्होंने वर्ष 2008 में रिद्म सोसायटी फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स की स्थापना की, जिसके माध्यम से वे बच्चों और युवाओं को भारतीय शास्त्रीय कला से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं।

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संघर्ष को ताकत बनाकर प्रेरणा बने तीनों भाई-बहन

पौड़ी जिले के निवासी निर्मल कुमार, मुकेश कुमार और अंजली की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद इन तीनों भाई-बहनों ने कभी अपनी परिस्थितियों को कमजोरी नहीं बनने दिया। संगीत और गायन के प्रति उनके जुनून ने उन्हें क्षेत्रीय और राज्य स्तर के अनेक मंचों तक पहुंचाया। अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से वे लगातार लोगों का दिल जीत रहे हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी बाधा व्यक्ति के सपनों को रोक नहीं सकती। तीनों भाई-बहन आज समाज के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं।

पुरस्कार से मिलेगा नई पीढ़ी को प्रोत्साहन

संस्कृति मंत्रालय के तहत कार्यरत संगीत नाटक अकादमी द्वारा यह सम्मान देशभर के उन कलाकारों को दिया जाता है जिन्होंने कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। इस सम्मान के तहत कलाकारों को ताम्रपत्र, प्रशस्ति पत्र, 50 हजार रुपये की सम्मान राशि और प्रस्तुति मानदेय प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार न केवल कलाकारों के कार्यों को सम्मान देता है बल्कि युवाओं को भी कला और संस्कृति के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

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उत्तराखंड की इन छह प्रतिभाओं का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना पूरे राज्य के लिए गौरव की बात है। लोक संगीत, शास्त्रीय नृत्य और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। यह सम्मान केवल कलाकारों की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भी जीत है।

Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर तैयार किया गया है। पुरस्कारों एवं संबंधित विवरणों में भविष्य में किसी प्रकार का आधिकारिक संशोधन होने पर जानकारी में बदलाव संभव है। पाठकों से अनुरोध है कि अंतिम पुष्टि के लिए संबंधित विभाग या आधिकारिक स्रोतों की जांच अवश्य करें।

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