Strict action against stray dogs in Dehradun :- देहरादून में पिछले कुछ समय से आवारा और आक्रामक कुत्तों का डर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा था। सुबह की सैर हो, बच्चों का स्कूल जाना हो या बाजार में पैदल निकलना, हर जगह लोगों के मन में अनजाना डर बना रहता था। लगातार सामने आ रही डॉग अटैक की घटनाओं ने शहरवासियों की चिंता को और बढ़ा दिया था। अब इस बीच सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख ने लोगों को बड़ी राहत की उम्मीद दी है। अदालत की टिप्पणी के बाद नगर निगम देहरादून भी अब पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी भी नागरिक को सार्वजनिक स्थानों पर बिना डर और भय के घूमने का अधिकार है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को मिला हुआ है। अदालत ने माना कि स्कूल, अस्पताल, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और सरकारी परिसरों जैसे संवेदनशील इलाकों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सार्वजनिक स्थानों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद दोबारा उसी इलाके में छोड़ने की पुरानी व्यवस्था पर अब सख्ती से विचार किया जाएगा। ऐसे कुत्तों को अब डॉग शेल्टर होम में रखने की व्यवस्था लागू की जाएगी ताकि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

राज्यों को दिए गए सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पर्याप्त संख्या में डॉग शेल्टर बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह संकेत भी दिया कि रैबीज संक्रमित और बेहद आक्रामक कुत्तों के मामलों में प्रशासन को सख्त कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है। सबसे अहम बात यह रही कि अदालत ने आदेशों का पालन न करने पर अवमानना की चेतावनी भी दी है। हाईकोर्ट्स को इन आदेशों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जमीनी स्तर पर कार्रवाई सही तरीके से हो सके। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि नियमों का पालन करने वाले अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा दी जाएगी।
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देहरादून में क्यों बढ़ा लोगों का डर
देहरादून में बीते कुछ महीनों के दौरान डॉग अटैक की घटनाएं लगातार बढ़ती रही हैं। कई इलाकों में बच्चों, बुजुर्गों और राह चलते लोगों पर हमलों की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं ने लोगों को मानसिक रूप से भी परेशान कर दिया है। हाल ही में जनगणना सर्वे के दौरान एक शिक्षिका पर रॉटविलर कुत्ते के हमले ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। इस घटना के बाद सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय प्रशासन तक हर जगह सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे। लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
नगर निगम देहरादून ने शुरू की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब नगर निगम देहरादून भी तेजी से रणनीति तैयार करने में जुट गया है। शासन स्तर से विस्तृत दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन निगम अधिकारियों ने प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। योजना के तहत शहर के सार्वजनिक स्थानों से आक्रामक और खूंखार कुत्तों को पकड़कर दोबारा उसी क्षेत्र में नहीं छोड़ा जाएगा। इसके लिए शेल्टर होम और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा चल रही है। प्रशासन का फोकस अब केवल पकड़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लंबे समय तक स्थायी समाधान तैयार करने पर रहेगा।

देहरादून के लोगों को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब जमीन पर भी असर दिखाई देगा। लंबे समय से लोग सुरक्षित सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की मांग कर रहे थे। यदि प्रशासन और नगर निगम मिलकर प्रभावी कार्रवाई करते हैं तो आने वाले समय में डॉग अटैक की घटनाओं में कमी आ सकती है और लोगों के भीतर का डर भी कम होगा।
Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। प्रशासनिक आदेशों और कानूनी दिशा-निर्देशों में समय के साथ बदलाव संभव है। किसी भी आधिकारिक निर्णय के लिए संबंधित सरकारी विभाग की पुष्टि जरूर करें।




