Site icon Uttarakhand Update

शुभ मुहूर्त में बच्चे का जन्म कराने की होड़, निजी अस्पतालों में हर दूसरा प्रसव ऑपरेशन से !

Auspicious Time Cesarean Delivery :- शुभ मुहूर्त में बच्चे का जन्म कराने की होड़ निजी अस्पतालों में हर दूसरा प्रसव ऑपरेशन से !

Auspicious Time Cesarean Delivery :- कभी बच्चे के जन्म का समय परिवार के लिए एक खूबसूरत सरप्राइज हुआ करता था। प्रसव पीड़ा शुरू होती थी और फिर घर से अस्पताल तक भागदौड़ शुरू हो जाती थी। लेकिन अब समय बदल रहा है। कई परिवार बच्चे के जन्म की तारीख और समय पहले से तय करना चाहते हैं। इसके पीछे कभी सुविधा होती है तो कभी कोई खास दिन, तारीख या शुभ मुहूर्त।  जन्माष्टमी के मौके पर उत्तराखंड में भी कुछ परिवारों ने अपने बच्चे के जन्म को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जोड़ने की इच्छा जताई।

देहरादून में स्वाइन फ्लू के साथ डेंगू और कोविड ने भी बढ़ाई चिंता, एक दिन में मिले 32 नए मरीज !

हल्द्वानी में 12 परिवारों ने जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में प्रसव कराने की इच्छा जाहिर की, जबकि देहरादून के निजी अस्पतालों में 20 से ज्यादा परिवारों ने ऑपरेशन के जरिए शुभ संयोग में बच्चे के जन्म का अनुरोध किया। हालांकि केवल शुभ मुहूर्त की चाह को सीजेरियन प्रसव बढ़ने की वजह नहीं माना जा सकता। इसके पीछे कई चिकित्सकीय और सामाजिक कारण हो सकते हैं। फिर भी उत्तराखंड में लगातार बढ़ता सीजेरियन प्रसव स्वास्थ्य व्यवस्था और परिवारों, दोनों के लिए विचार करने वाला विषय जरूर बन गया है।

Cesarean Delivery in Uttarakhand

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में सीजेरियन प्रसव की दर पिछले वर्षों में लगातार बढ़ी है। स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 में जहां यह दर 13.1 प्रतिशत थी, वहीं स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 में बढ़कर 20.4 प्रतिशत पहुंच गई। अब स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 में प्रदेश में कुल सीजेरियन प्रसव की दर 25.9 प्रतिशत दर्ज की गई है। यानी करीब एक दशक के दौरान सीजेरियन डिलीवरी का आंकड़ा लगभग दोगुना हो गया है। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब अस्पतालों में संस्थागत प्रसव की संख्या भी बढ़ी है।

निजी अस्पतालों में हर दूसरा प्रसव सीजेरियन

उत्तराखंड में सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच सीजेरियन प्रसव के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई देता है। निजी अस्पतालों में होने वाले प्रसव में 47.7 प्रतिशत मामलों में सीजेरियन डिलीवरी हुई। आसान भाषा में कहें तो निजी स्वास्थ्य संस्थानों में करीब हर दूसरा प्रसव ऑपरेशन के जरिए हो रहा है। इसके मुकाबले सरकारी अस्पतालों में सीजेरियन प्रसव की दर 14.7 प्रतिशत रही।  यानी दोनों के बीच काफी बड़ा अंतर है। स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 में निजी संस्थानों में सीजेरियन प्रसव की दर 43.3 प्रतिशत थी, जो अगले सर्वेक्षण में बढ़कर 47.7 प्रतिशत हो गई। सरकारी संस्थानों में यह आंकड़ा 14 प्रतिशत से बढ़कर 14.7 प्रतिशत हुआ।

सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली ने ली एक और मां-बच्चे की जान !

अस्पतालों में प्रसव बढ़े, लेकिन सरकारी अस्पतालों की हिस्सेदारी घटी

उत्तराखंड में अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के दौरान 83.2 प्रतिशत प्रसव संस्थागत स्तर पर हुए थे। स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 में यह आंकड़ा बढ़कर 88.9 प्रतिशत हो गया। यह एक सकारात्मक बदलाव है क्योंकि अधिक महिलाएं अब अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के लिए पहुंच रही हैं। लेकिन इसी दौरान सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाले प्रसव की हिस्सेदारी घट गई। सरकारी संस्थानों में प्रसव का हिस्सा 53.3 प्रतिशत से कम होकर 49.9 प्रतिशत रह गया। इसका मतलब है कि अस्पतालों में प्रसव की पहुंच तो बढ़ी, लेकिन सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी स्वास्थ्य संस्थानों पर लोगों की निर्भरता भी बढ़ी है।

जन्माष्टमी पर शुभ मुहूर्त में बच्चे के जन्म की चाह

बच्चे का जन्म परिवार के लिए जिंदगी का सबसे खास पल होता है। ऐसे में माता-पिता इस दिन को और भी यादगार बनाने के लिए कई तरह की उम्मीदें रखते हैं। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय से अपने बच्चे के जन्म को जोड़ने की इच्छा भी इसी भावनात्मक सोच का हिस्सा है। हल्द्वानी में 12 परिवारों द्वारा जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में प्रसव की इच्छा जताना और देहरादून के निजी अस्पतालों में 20 से अधिक परिवारों का सीजेरियन के जरिए शुभ समय पर बच्चे के जन्म का अनुरोध करना इसी बदलती सोच की ओर इशारा करता है।

हालांकि बच्चे का जन्म कब और किस तरीके से होगा, इसका फैसला केवल शुभ समय देखकर नहीं किया जा सकता। मां और बच्चे की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। यदि सामान्य प्रसव चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित है तो केवल किसी खास समय या तारीख के लिए ऑपरेशन कराने का फैसला सोच-समझकर ही लिया जाना चाहिए।

जिलों में भी दिख रहा है बड़ा अंतर

उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में सीजेरियन प्रसव की दर एक जैसी नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नैनीताल में यह दर सबसे अधिक 30.1 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद देहरादून में 25.8 प्रतिशत और हरिद्वार में 22.1 प्रतिशत सीजेरियन प्रसव हुए। ऊधमसिंह नगर में यह आंकड़ा 20.4 प्रतिशत, पिथौरागढ़ में 17 प्रतिशत और रुद्रप्रयाग में 16.7 प्रतिशत रहा। अल्मोड़ा और चंपावत में यह दर 16.3 प्रतिशत दर्ज की गई। टिहरी में 15 प्रतिशत, बागेश्वर में 12.4 प्रतिशत और पौड़ी गढ़वाल में 9.4 प्रतिशत सीजेरियन प्रसव हुए। चमोली में यह आंकड़ा 8.8 प्रतिशत और उत्तरकाशी में सबसे कम 6.2 प्रतिशत रहा।

उत्तराखंड के अग्निवीरों की बल्ले-बल्ले, रिटायर्ड आते ही मिलेगी सरकारी नौकरी !

Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों और दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है और इसे चिकित्सकीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए। प्रसव का तरीका और समय तय करने का निर्णय हमेशा योग्य डॉक्टर की सलाह और मां-बच्चे की चिकित्सकीय स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

Exit mobile version