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देवभूमि की हवा भी जहरीली? देहरादून में AQI के बढ़ाई लोगों की चिंता !

By A S
January 1, 2026 6:53 PM
Dehradun Air Quality :- देवभूमि की हवा भी जहरीली? देहरादून में AQI के बढ़ाई लोगों की चिंता !
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Dehradun Air Quality :- कभी सुबह की ठंडी हवा में गहरी सांस लेना देहरादून की पहचान हुआ करता था। दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा से परेशान लोग जब पहाड़ों की ओर भागते थे, तो देहरादून उन्हें सुकून देता था। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। आज अगर आप सिर्फ साफ हवा की उम्मीद में देहरादून आने का मन बना रहे हैं, तो सच्चाई जानना जरूरी है, क्योंकि देवभूमि की हवा भी अब पहले जैसी शुद्ध नहीं रही।

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यह चिंता किसी अफवाह पर नहीं, बल्कि बीते पांच वर्षों के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है। बदलता मौसम, बढ़ता ट्रैफिक और तेज शहरीकरण ने देहरादून की हवा पर गहरा असर डाला है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पिछले पांच सालों में Dehradun Air Quality कैसे बदला, आज हालात कितने गंभीर हैं और इसकी असली वजहें क्या हैं।

पिछले पांच सालों में कैसे बदली देहरादून की हवा

अगर हम 2020 की बात करें, तो उस साल देहरादून की हवा अपेक्षाकृत राहत भरी थी। कोविड-19 लॉकडाउन के कारण सड़कों पर गाड़ियां कम थीं, उद्योग लगभग बंद थे और नतीजा यह हुआ कि औसत AQI करीब 59 रहा। उस समय हवा को संतोषजनक माना गया।

लेकिन 2021 आते-आते जैसे ही जिंदगी पटरी पर लौटी, हवा भी बिगड़ने लगी। ट्रैफिक बढ़ा, निर्माण कार्य तेज हुए और AQI बढ़कर लगभग 115 तक पहुंच गया। 2022 देहरादून के लिए सबसे कठिन साल साबित हुआ, जब औसत AQI करीब 139 दर्ज किया गया और हवा साफ से अस्वस्थ श्रेणी में पहुंच गई।

Dehradun Air Quality :- देवभूमि की हवा भी जहरीली? देहरादून में AQI के बढ़ाई लोगों की चिंता !

2023 में थोड़ी राहत जरूर मिली। औसत AQI घटकर लगभग 90 रहा और 2024 में भी यही स्थिति बनी रही। लेकिन यह सुधार स्थायी नहीं रहा। 2025 में अब तक का औसत AQI लगभग 108 तक पहुंच चुका है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 19 प्रतिशत ज्यादा है। सर्दियों में यह आंकड़ा और डराने वाला हो जाता है।

जब AQI 267 से 294 तक पहुंच गया

दिसंबर 2025 के मध्य में देहरादून की हवा ने कई लोगों को चौंका दिया। 17 और 18 दिसंबर को शहर का AQI 267 से 294 के बीच दर्ज किया गया। यह स्तर ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ और कुछ समय के लिए ‘गंभीर’ श्रेणी तक पहुंच गया। इसका मतलब साफ है कि उस दौरान हवा में सांस लेना बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए खतरनाक हो सकता था।

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PM2.5 और NO₂ क्यों बन रहे हैं सबसे बड़ी समस्या

विशेषज्ञों के अनुसार देहरादून में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पुराने वाहन, रोजाना लगने वाला ट्रैफिक जाम और निम्न गुणवत्ता वाला ईंधन हवा में PM2.5 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ा रहा है। ये वही सूक्ष्म कण हैं जो सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं।

Dehradun Air Quality :- देवभूमि की हवा भी जहरीली? देहरादून में AQI के बढ़ाई लोगों की चिंता !

इसके साथ ही शहर का तेजी से फैलाव भी एक बड़ी वजह है। नई इमारतें, चौड़ी होती सड़कें और लगातार चल रहे निर्माण कार्य हवा में PM10 जैसे भारी कणों की मात्रा बढ़ा रहे हैं। खुले में कचरा जलाना और सर्दियों में लकड़ी या कोयले से आग जलाना भी हालात को और बिगाड़ देता है।

जंगल की आग और मौसम भी बढ़ा रहे हैं खतरा

देहरादून के आसपास जंगलों में लगने वाली आग का धुआं भी शहर की हवा तक पहुंचता है। यह धुआं पहले से मौजूद प्रदूषकों के साथ मिलकर हवा को और जहरीला बना देता है। इसके अलावा छोटे उद्योगों से निकलने वाला अनियंत्रित धुआं भी एक अहम कारण है।

सर्दियों में स्थिति इसलिए और खराब हो जाती है क्योंकि तापमान उलटाव, हवा की धीमी रफ्तार, घना कोहरा और हाल के वर्षों में दर्ज किया गया सूखा, ये सभी मिलकर प्रदूषक कणों को वातावरण में फंसा देते हैं। नतीजा यह होता है कि हवा साफ होने की बजाय और ज्यादा भारी हो जाती है।

सरकारी प्रयास और आगे की जरूरत

सरकार ने प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत कई कदम उठाए हैं। इनमें वाहनों की PUC जांच, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और लोगों को जागरूक करना शामिल है। आंकड़े और मॉनिटरिंग मुख्य रूप से Central Pollution Control Board और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स से लिए जाते हैं। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि कागजों से ज्यादा जरूरत जमीन पर सख्ती और निरंतर कार्रवाई की है, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं।

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