Dehradun Protest Against Jantar Mantar Lathicharge :- दिल्ली में प्रदर्शनकारी युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अब विरोध की आवाज उत्तराखंड तक पहुंच गई है। राजधानी देहरादून में मंगलवार को विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और छात्र संगठनों के लोग एकजुट होकर सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रोजगार, पारदर्शिता और न्याय की मांग कर रहे युवाओं की आवाज को बल प्रयोग से दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। इसी मुद्दे को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं।
गढ़वाली सिनेमा का सुनहरा पल, गढ़वाली फिल्म ने जीता नेशनल अवॉर्ड !
देहरादून में संगठनों ने जताया विरोध
दिल्ली में प्रदर्शनकारी युवाओं पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को देहरादून में विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और छात्र संगठनों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर केंद्र सरकार से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखने वाले युवाओं के साथ बल प्रयोग बेहद चिंताजनक है। उनका मानना है कि ऐसी घटनाएं युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करती हैं और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
छह प्रमुख मांगों को लेकर उठाई आवाज
ज्ञापन में प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग कर उसकी जगह एक स्वतंत्र और संवैधानिक निकाय का गठन किया जाए। इसके साथ ही दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने तथा आंदोलन कर रहे युवाओं से संवाद स्थापित कर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील भी की गई। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि नीट समेत सभी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों का भरोसा बना रहे।
कई संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद
इस दौरान विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपा। इनमें सीपीएम के सचिव अनंत आकाश, राष्ट्रीय उत्तराखंड पार्टी के बालेश बबानिया, उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के सुरेश कुमार, उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय महामंत्री लताफत हुसैन, सीटू के अध्यक्ष एसएस नेगी, भीम आर्मी के अध्यक्ष आजम खान, अधिवक्ता अनुराधा, दुर्गा ध्यानी और नितिन मलेठा सहित कई अन्य लोग शामिल रहे।
गांधी पार्क में सुराज सेवा दल का धरना
इसी मुद्दे को लेकर सुराज सेवा दल ने भी मंगलवार को देहरादून के गांधी पार्क में धरना-प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदेश महामंत्री देवेंद्र बिष्ट ने कहा कि रोजगार और न्याय की मांग कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज होना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
वहीं जिला अध्यक्ष सुमित अग्रवाल और युवा अध्यक्ष हिमांशु धामी ने कहा कि युवाओं की आवाज को बल प्रयोग से दबाया नहीं जा सकता और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। प्रदर्शन में विजेंद्र, कावेरी जोशी, राजेश थापा, पूजा नेगी, अमित अग्रवाल, मोनू सहित कई कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और युवाओं के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की।
लोकतांत्रिक संवाद की उठी मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से होना चाहिए। उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और युवाओं का भरोसा बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने केंद्र सरकार से संवाद स्थापित कर उचित निर्णय लेने की अपील की है।
Disclaimer :- यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। इस लेख का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। मामले से जुड़े किसी भी आधिकारिक निर्णय, जांच या सरकारी बयान के बाद तथ्यों में बदलाव संभव है।

