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भारतीय निशानेबाजी जगत को लगा बड़ा झटका, दिग्गज कोच जशपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन !

By A S
June 12, 2026 10:35 AM
Jaspal Rana :- भारतीय निशानेबाजी जगत को लगा बड़ा झटका, दिग्गज कोच जशपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन !
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Jaspal Rana :- भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर निशानेबाज, एशियन गेम्स के पदक विजेता और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कोच जशपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके अचानक चले जाने की खबर ने पूरे खेल जगत को स्तब्ध कर दिया है। जशपाल राणा न केवल एक बेहतरीन खिलाड़ी थे, बल्कि उन्होंने भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई थी। दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि हाल ही में उनकी सर्जरी भी हुई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन से भारतीय निशानेबाजी समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है।

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फ्लाइट के दौरान बिगड़ी थी तबीयत

जानकारी के अनुसार जशपाल राणा जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप में भारतीय टीम के साथ मौजूद थे। प्रतियोगिता में भारतीय निशानेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया और कई पदक अपने नाम किए। इसी टूर्नामेंट के बाद जब भारतीय दल स्वदेश लौट रहा था, तब उड़ान के दौरान उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। दिल्ली पहुंचते ही उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। जांच में हृदय संबंधी समस्या सामने आई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उनके दिल में स्टेंट डालने की प्रक्रिया पूरी की। हालांकि इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो पाया और अंततः उनका निधन हो गया।

Jaspal Rana :- भारतीय निशानेबाजी जगत को लगा बड़ा झटका, दिग्गज कोच जशपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन !

भारतीय शूटिंग को नई पहचान देने वाले कोच थे जशपाल राणा

जशपाल राणा का नाम भारतीय निशानेबाजी इतिहास के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों और कोचों में लिया जाता है। उन्होंने एक खिलाड़ी के रूप में देश के लिए कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते और बाद में कोच बनकर नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार किया। उनकी कोचिंग शैली अनुशासन, कड़ी मेहनत और तकनीकी उत्कृष्टता के लिए जानी जाती थी। यही वजह रही कि कई युवा निशानेबाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर सके। भारतीय निशानेबाजी को विश्व मंच पर मजबूत पहचान दिलाने में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

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मनु भाकर की सफलता के पीछे था उनका मार्गदर्शन

जशपाल राणा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में स्टार शूटर मनु भाकर को तैयार करना शामिल है। उन्होंने मनु भाकर को लंबे समय तक प्रशिक्षित किया और उनके खेल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पेरिस ओलंपिक 2024 में मनु भाकर ने दो ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। इस सफलता के पीछे जशपाल राणा के अनुभव, मार्गदर्शन और मेहनत को भी अहम माना जाता है। उनके प्रशिक्षण ने कई युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन करने की ताकत दी।

Jaspal Rana :- भारतीय निशानेबाजी जगत को लगा बड़ा झटका, दिग्गज कोच जशपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन !

फरवरी 2025 में बने थे हाई-परफॉर्मेंस कोच

भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने फरवरी 2025 में जशपाल राणा को 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। उनकी देखरेख में भारतीय टीम ने म्यूनिख विश्व कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीते थे। उनकी रणनीति और प्रशिक्षण पद्धति को खिलाड़ियों और अधिकारियों दोनों द्वारा बेहद सराहा जाता था। कम समय में ही उन्होंने भारतीय टीम के प्रदर्शन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया।

द्रोणाचार्य पुरस्कार से हुआ था सम्मान

खेल और खिलाड़ियों के विकास में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। यह सम्मान उन कोचों को दिया जाता है जिन्होंने खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो। जशपाल राणा इस सम्मान के पूरी तरह हकदार थे क्योंकि उन्होंने अपने पूरे करियर में भारतीय शूटिंग को मजबूत बनाने के लिए अथक प्रयास किए।

खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में छोड़ी अमिट छाप

जशपाल राणा ने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियनशिप सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अनेक पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया और बाद में कोच के रूप में भी उसी समर्पण के साथ काम किया। करीब तीन दशकों से अधिक समय तक उन्होंने भारतीय निशानेबाजी को अपना योगदान दिया। उनकी उपलब्धियां और उनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ी आने वाले वर्षों तक उनकी विरासत को आगे बढ़ाते रहेंगे।

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जशपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा। उन्होंने अपने जीवन को पूरी तरह खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए समर्पित कर दिया था। आज उनके जाने से न केवल भारतीय शूटिंग समुदाय बल्कि पूरे देश में शोक का माहौल है। उनकी उपलब्धियां, उनके विचार और उनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ी हमेशा उन्हें जीवित रखेंगे। भारतीय खेल इतिहास में उनका नाम सम्मान और गर्व के साथ याद किया जाता रहेगा।

Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक रूप से साझा की गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। घटना से जुड़ी आधिकारिक जानकारी या जांच रिपोर्ट आने पर तथ्यों में बदलाव संभव है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि अवश्य करें।

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