Nanda Devi Badi Jat Controversy :- नंदा देवी की कैलाश यात्रा आगे बढ़ चुकी है, लेकिन बड़ी जात यात्रा को लेकर उठा विवाद अभी शांत होता नजर नहीं आ रहा है। सिद्धपीठ कुरूड़ से नंदा देवी की तीन डोलियां कैलाश यात्रा के लिए रवाना होने के चार दिन बाद भी यात्रा के अंतिम गांव वांण में श्रद्धालुओं के प्रवेश और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति के बीच मतभेद बने हुए हैं।
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वांण गांव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से संभावित अव्यवस्था और कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर ग्राम प्रधान की शिकायत के बाद चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बड़ी जात आयोजन समिति को चेतावनी पत्र जारी किया है। वहीं, समिति ने प्रशासन को जवाब देते हुए कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था करना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। समिति ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग भी उठाई है।
डीएम ने आयोजन समिति को भेजा चेतावनी पत्र
चार सितंबर को जिलाधिकारी गौरव कुमार की ओर से नायब तहसीलदार नंदानगर (घाट) के माध्यम से बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत को पत्र भेजा गया। इस पत्र में वांण की ग्राम प्रधान नंदुली देवी की शिकायत का हवाला दिया गया। शिकायत में आशंका जताई गई थी कि बड़ी जात के दौरान मां राजराजेश्वरी की डोली के साथ अन्य डोलियां और बड़ी संख्या में श्रद्धालु वांण गांव पहुंच सकते हैं।

इससे गांव में भीड़ बढ़ने के साथ अव्यवस्था और अशांति की स्थिति पैदा होने की आशंका है। प्रशासन ने आयोजन समिति से ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के साथ बातचीत कर आपसी सहमति से मामले का समाधान निकालने को कहा है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यात्रा के दौरान यदि शांति या कानून व्यवस्था प्रभावित होती है तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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समिति ने प्रशासन के सामने रखा अपना पक्ष
डीएम के पत्र के जवाब में सोमवार को बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने तीन पेज का जवाब प्रशासन को भेजा। समिति का कहना है कि बड़ी जात का आयोजन अचानक नहीं किया गया है, बल्कि इसे महीनों पहले सिद्धपीठ कुरूड़ के पुजारियों, डोली समिति और मंदिर समिति की सहमति से तय किया गया था। कर्नल रावत ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि गौड़ पुजारियों का एक गुट, जिसका संबंध राजजात समिति नौटी से भी बताया गया है, यात्रा में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास कर रहा है।

समिति ने इसे एक सुनियोजित प्रयास बताते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। समिति का कहना है कि उसने यात्रा को लेकर शासन-प्रशासन, राजजात समिति और अन्य संबंधित समितियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि वह प्रशासन के साथ बातचीत और समन्वय के लिए तैयार है।
वांण में लाटू देवता मंदिर को लेकर भी जुड़ा आस्था का सवाल
विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू वांण गांव में स्थित लाटू देवता का पौराणिक मंदिर भी है। नंदा देवी के धर्मभाई माने जाने वाले लाटू देवता का यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र है। आयोजन समिति ने अपने जवाब में कहा कि वांण में प्रवेश को लेकर किसी तरह की रोक या आपत्ति केवल प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। समिति के अनुसार, यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है।
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दुर्गम यात्रा मार्ग पर व्यवस्थाओं को लेकर समिति की मांग
नंदा देवी की डोलियां कैलाश गमन के लिए आगे बढ़ चुकी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। बड़ी जात समिति ने प्रशासन से समय रहते दुर्गम और निर्जन पड़ावों पर जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है। यात्रा मार्ग कठिन और कई स्थानों पर बेहद दुर्गम माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, रास्ते में जरूरी सुविधाएं और कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि होमकुंड तक पहुंचने वाली इस धार्मिक यात्रा के दौरान प्रशासन और आयोजन समिति के बीच समन्वय किस तरह होता है और श्रद्धालुओं के लिए किस स्तर की व्यवस्थाएं की जाती हैं। फिलहाल, नंदा देवी की डोलियां कैलाश यात्रा पर आगे बढ़ चुकी हैं और बड़ी जात को लेकर विवाद भी जारी है। आने वाले दिनों में प्रशासन की तैयारियों और दोनों पक्षों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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Disclaimer :- यह खबर उपलब्ध जानकारी, प्रशासनिक पत्राचार और आयोजन समिति की ओर से सामने रखे गए पक्ष के आधार पर तैयार की गई है। इसमें शामिल आरोप संबंधित पक्षों के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। विवाद से जुड़े नए तथ्य या प्रशासन का कोई अन्य पक्ष सामने आने पर स्थिति में बदलाव संभव है।




