Nursing Protest For Year wise Recruitment :- उत्तराखंड में नर्सिंग बेरोजगारों का आंदोलन अब भावनात्मक और उग्र मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे युवाओं का सब्र सोमवार सुबह टूट गया, जब कुछ प्रदर्शनकारी परेड ग्राउंड स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए। रोजगार की उम्मीद में महीनों से संघर्ष कर रहे इन युवाओं का कहना है कि सरकार लगातार उनकी अनदेखी कर रही है, जबकि कई अभ्यर्थियों की आर्थिक और मानसिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
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सोमवार सुबह करीब पांच बजे कविता, विनोद समेत चार नर्सिंग बेरोजगार परेड ग्राउंड की पानी की टंकी पर चढ़ गए। उनके समर्थन में प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला भी टंकी पर पहुंच गईं। इस दौरान मौके पर भारी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को नीचे उतरने के लिए समझाने का प्रयास किया। टंकी पर चढ़े युवाओं ने साफ कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक आश्वासन नहीं देती, तब तक वे नीचे नहीं उतरेंगे। उनका कहना है कि वर्षों की पढ़ाई और प्रशिक्षण के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिल रही, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
158 दिन से जारी है धरना
नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले एकता विहार में चल रहा धरना सोमवार को 158वें दिन में प्रवेश कर गया, जबकि अनशन का यह 23वां दिन रहा। लगातार जारी आंदोलन के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आने से बेरोजगार युवाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कई साथियों की तबीयत बिगड़ चुकी है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई गंभीर पहल नहीं हुई। युवाओं का आरोप है कि बार-बार आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जा रहा।
वर्षवार भर्ती लागू करने की उठी मांग
प्रदर्शन कर रहे नर्सिंग बेरोजगारों की मुख्य मांग है कि नर्सिंग भर्ती नियमावली को स्थायी रूप से वर्षवार लागू किया जाए। उनका कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और हर साल नियमित रूप से पदों पर भर्ती हो सकेगी। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने आईपीएचएस मानकों के अनुसार पहले की तरह 2000 पदों पर वर्षवार भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग भी उठाई। उनका मानना है कि अस्पतालों में स्टाफ की कमी होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में देरी युवाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है।
नर्सिंग बेरोजगारों का आंदोलन अब सिर्फ नौकरी की मांग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के भविष्य और सरकारी भर्ती व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। लगातार बढ़ते विरोध और आंदोलन के उग्र रूप को देखते हुए सरकार और प्रशासन के सामने स्थिति को संभालना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

