Tilak Raj Behar :- कभी-कभी खबरें ऐसी होती हैं जो पहली नजर में सहानुभूति जगाती हैं, लेकिन जैसे-जैसे परतें खुलती हैं, सच हैरान कर देता है। किच्छा में आवास विकास क्षेत्र के पार्षद सौरभ बेहड़ पर रविवार रात हुए हमले का मामला भी कुछ ऐसा ही निकला। शुरुआत में यह एक राजनीतिक रंजिश और हिंसक वारदात जैसा लगा, लेकिन पुलिस जांच ने इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर ही बदल दी।
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किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ के पुत्र और पार्षद सौरभ बेहड़ पर उस वक्त हमला हुआ था जब वह एक पंचायत के लिए जा रहे थे। बाइक सवार तीन युवकों ने उनकी स्कूटी को लात मारकर गिराया और बेरहमी से पिटाई कर दी। गंभीर रूप से घायल सौरभ को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और पुलिस ने हमलावरों की तलाश के लिए कई टीमें लगा दीं।
कुछ ही दिनों में पुलिस की मेहनत रंग लाई। गश्त के दौरान बिना नंबर प्लेट की बाइक पर घूम रहे तीन युवकों को रोका गया। पूछताछ और तलाशी में उनके पास से तमंचे, कारतूस और चाकू बरामद हुए। यहीं से कहानी ने नया मोड़ लिया। जब सख्ती से पूछताछ हुई तो तीनों ने कबूल किया कि यह हमला किसी दुश्मनी में नहीं, बल्कि खुद पार्षद की रजामंदी से किया गया था।
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पुलिस के मुताबिक इस पूरी साजिश के पीछे पार्षद के करीबी इंदर नारंग का नाम सामने आया, जिसने हमलावरों को सिर्फ 1500 रुपये देकर यह काम करवाया। पहले तो हमलावरों ने बेहड़ नाम सुनते ही इनकार कर दिया था, लेकिन जब यह बताया गया कि हमला खुद सौरभ के कहने पर है, तब वे तैयार हो गए। तय जगह पर जाकर उन्होंने पूरी योजना के मुताबिक वारदात को अंजाम दिया।
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इस चौंकाने वाले खुलासे की पुष्टि करते हुए मणिकांत मिश्रा ने बताया कि चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया गया है। वहीं निहारिका तोमर ने भी पूछताछ के दौरान सामने आई साजिश की पूरी कहानी साझा की। यह मामला अब सिर्फ एक हमले का नहीं, बल्कि झूठी सहानुभूति और गलत मकसद से रची गई कहानी का उदाहरण बन गया है।
Disclaimer :- यह लेख पुलिस द्वारा दी गई जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और न्यायालय के निर्णय के अनुसार तथ्यों में बदलाव संभव है।

