Unrecognized Private Schools in Uttarakhand :- किसी भी माता-पिता के लिए अपने बच्चे की पढ़ाई सबसे बड़ी चिंता होती है। स्कूल सिर्फ इमारत नहीं होता, वह भरोसा होता है, उम्मीद होती है और एक बेहतर भविष्य की नींव होता है। इसी भरोसे को मजबूत करने की दिशा में उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने का बड़ा कदम उठाया गया है। अब बिना मान्यता चल रहे निजी स्कूलों पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
उत्तराखंड में शिक्षकों पर बड़ा फैसला, 6 महीने का कोर्स या नौकरी खत्म !
रुद्रप्रयाग में 69 निजी स्कूलों को नोटिस
राज्य के शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि नियमों से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब दरवाजे बंद हैं। रुद्रप्रयाग जिले में ऐसे 69 निजी स्कूलों की पहचान की गई है, जो बिना वैध मान्यता के संचालित हो रहे थे। इन सभी स्कूलों को 15 दिन का अंतिम नोटिस जारी किया गया है। तय समय सीमा के भीतर अगर मान्यता से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं, तो स्कूलों को तत्काल बंद कर दिया जाएगा।
यह कार्रवाई केवल कागजी नहीं है, बल्कि जमीन पर लागू होने वाली सख्त पहल है। शिक्षा विभाग का मानना है कि बिना मान्यता के चल रहे स्कूल बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ कर रहे हैं, जिसे अब किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बच्चों के भविष्य से कोई समझौता नहीं
लंबे समय से यह शिकायतें सामने आ रही थीं कि कई जिलों में प्री-प्राइमरी और प्राइमरी स्तर तक के स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। कुछ संस्थानों ने कभी मान्यता ली भी थी, लेकिन बाद में उसका नवीनीकरण नहीं कराया और फिर भी पढ़ाई जारी रखी। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निजी स्कूलों की मान्यता की गहन जांच की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।
देवभूमि की हवा भी जहरीली? देहरादून में AQI के बढ़ाई लोगों की चिंता !
उनका साफ कहना है कि शिक्षा के नाम पर बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह फैसला उन अभिभावकों के लिए भी राहत लेकर आया है, जो अनजाने में ऐसे स्कूलों पर भरोसा कर बैठते हैं।

Right to Education Act के तहत भारी जुर्माना
रुद्रप्रयाग जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी पी.के. बिष्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 69 स्कूलों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं और बंद करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। यदि 15 दिन की अवधि में मान्यता से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होता है, तो संबंधित स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल की जिम्मेदारी तय की जाएगी। ऐसे मामलों में आरटीई एक्ट के तहत एक लाख रुपये तक का आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा। इसके साथ ही प्राथमिक शिक्षा निदेशक से सभी जिलों की रिपोर्ट तलब की गई है, जिससे यह साफ है कि आने वाले समय में यह कार्रवाई सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं रहेगी।




