Uttarakhand Home Guard Uniform Scam :- कभी-कभी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि भीतर तक झकझोर देती हैं। उत्तराखंड होमगार्ड विभाग में सामने आया वर्दी घोटाला भी कुछ ऐसा ही है। जिन जवानों की पहचान उनकी वर्दी से होती है, उसी वर्दी की खरीद में करोड़ों रुपये का खेल होना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। यह मामला सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो जवान और आम लोग प्रशासन पर करते हैं।
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कैसे सामने आया वर्दी घोटाले का सच
वित्तीय वर्ष 2024-25 में होमगार्ड जवानों के लिए वर्दी और उससे जुड़ा सामान खरीदा गया। कागजों में इसकी कीमत करीब तीन करोड़ रुपये दिखाई गई, जबकि बाजार भाव के हिसाब से यही सामान लगभग एक करोड़ रुपये में आसानी से मिल सकता था। शुरुआत में यह घपला फाइलों में दबा रहा, लेकिन जब 2025-26 के लिए भी उसी महंगे रेट पर नया टेंडर निकाला गया, तो विभाग में तैनात नए डीजी पीवीके प्रसाद को इसमें गड़बड़ी की आशंका हुई। उन्होंने बिना देर किए टेंडर प्रक्रिया रद कराई और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए।
जांच में उजागर हुआ तीन गुना कीमत का खेल
जांच रिपोर्ट ने जो तस्वीर पेश की, वह हैरान करने वाली थी। सामने आया कि डिप्टी कमांडेंट जनरल अमिताभ श्रीवास्तव ने ठेकेदार के साथ मिलकर बाजार से तीन गुना ज्यादा दामों पर सामान खरीदा। एक साधारण जूता, जिसकी कीमत करीब 500 रुपये थी, उसे 1500 रुपये में खरीदा गया। इसी तरह पेंट-शर्ट, जैकेट और अन्य जरूरी सामान भी कई गुना महंगे रेट पर बिलों में दिखाए गए। जब जांच टीम ने बाजार से वास्तविक कोटेशन जुटाए, तो साफ हो गया कि यह एक सुनियोजित घपला था।
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डीजी की सख्ती और शासन को भेजी गई रिपोर्ट
घोटाले की पुष्टि होते ही डीजी ने कड़ा रुख अपनाया। न सिर्फ आगे की वर्दी खरीद पर तत्काल रोक लगा दी गई, बल्कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज कराने, दो करोड़ रुपये की रिकवरी कराने और सेवा से बर्खास्त करने की सिफारिश भी शासन को भेजी गई। इस रिपोर्ट के बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है और अब सभी की नजरें इस पर हैं कि आगे क्या फैसला लिया जाता है।
जवानों के लिए बदली जाएगी वर्दी खरीद की व्यवस्था
इस पूरे प्रकरण के बाद विभाग ने भविष्य के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब वर्दी खरीद की बजाय जवानों को सीधे वर्दी भत्ता देने की प्रक्रिया लागू की जाएगी। माना जा रहा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और बीच में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम होगी। यह फैसला उन जवानों के लिए राहत की खबर है, जो ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाते हैं और जिनका मनोबल ऐसे मामलों से प्रभावित होता है।
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सिस्टम और भरोसे पर उठते सवाल
होमगार्ड वर्दी घोटाला यह सोचने पर मजबूर करता है कि अगर निगरानी समय पर न हो, तो कैसे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया जा सकता है। वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं होती, वह जिम्मेदारी और सम्मान का प्रतीक होती है। ऐसे में उसका गलत इस्तेमाल पूरे विभाग की साख पर दाग लगाता है। अब उम्मीद यही है कि इस मामले में सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई होगी, ताकि आगे कोई भी इस तरह की हिम्मत न कर सके।
Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी पर आधारित है। जांच अभी प्रक्रियाधीन है और किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार केवल न्यायालय को है। अंतिम निर्णय के बाद तथ्यों में बदलाव संभव है।

