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बेल्ट और चप्पलों से पिटाई, दून मेडिकल कॉलेज रैगिंग केस में बड़ा फैसला, 9 छात्रों को निकाला गया, दो पर भारी जुर्माना !

Dehradun Medical College Ragging Case :- बेल्ट और चप्पलों से पिटाई, दून मेडिकल कॉलेज रैगिंग केस में बड़ा फैसला, 9 छात्रों को निकाला गया, दो पर भारी जुर्माना !

Dehradun Medical College Ragging Case :- कभी-कभी कुछ घटनाएं इतनी चुपचाप घटती हैं कि उनका शोर बाद में पूरे समाज को सुनाई देता है। देहरादून के गवर्नमेंट Dehradun Medical College में सामने आया रैगिंग का मामला भी कुछ ऐसा ही है। मेडिकल की पढ़ाई का सपना लेकर आए छात्रों के लिए हॉस्टल सुरक्षित जगह होनी चाहिए थी, लेकिन यहां डर, हिंसा और अपमान की तस्वीर सामने आई, जिसने हर संवेदनशील इंसान को सोचने पर मजबूर कर दिया।

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हॉस्टल में हुई रैगिंग ने मचाया हड़कंप

कॉलेज के लड़कों के हॉस्टल में रैगिंग की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आईं। जांच में सामने आया कि 2025 बैच के एक जूनियर छात्र के साथ मारपीट की गई। उसे बेल्ट और चप्पलों से पीटा गया और जबरन उसके बाल काट दिए गए। यह सिर्फ शारीरिक हिंसा नहीं थी, बल्कि एक छात्र के आत्मसम्मान को तोड़ने की कोशिश थी। दूसरी घटना में एक छात्र ने सीनियर छात्रों पर हॉस्टल में रैगिंग करने का आरोप लगाया, जिसकी पुष्टि CCTV फुटेज से हुई।

एंटी-रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट और प्रशासन की सख्ती

मामला सामने आने के बाद कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी ने जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रिंसिपल को सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज प्रशासन ने बिना देरी किए सख्त कदम उठाए। वर्ष 2023 और 2024 बैच के कुल 9 छात्रों को हॉस्टल और क्लासरूम से बाहर कर दिया गया। यह संदेश साफ था कि रैगिंग को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

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दोषियों पर जुर्माना और कड़ी कार्रवाई

जूनियर छात्र पर हमला करने के आरोपी दो छात्रों को पूरे सेशन और इंटर्नशिप अवधि के लिए हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया। इसके साथ ही उन्हें दो महीने तक कक्षा में बैठने की अनुमति भी नहीं दी गई। दोनों छात्रों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। दूसरी घटना में CCTV फुटेज से पहचाने गए सात छात्रों को तीन महीने के लिए हॉस्टल और एक महीने के लिए क्लास से बाहर किया गया।

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छात्रों की काउंसलिंग और भविष्य की चेतावनी

कॉलेज प्रशासन ने यह भी साफ किया कि मामला केवल सजा तक सीमित नहीं है। छात्रों की काउंसलिंग के निर्देश दिए गए हैं ताकि डर और मानसिक दबाव से बाहर निकलने में उनकी मदद हो सके। सभी वार्डन और स्टाफ को हॉस्टल में अतिरिक्त सतर्कता बरतने और छात्रों से लगातार संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रिंसिपल का स्पष्ट कहना है कि रैगिंग जैसी अनुशासनहीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह पूरा मामला मेडिकल कॉलेजों के लिए एक चेतावनी है कि पढ़ाई के साथ-साथ सुरक्षित और मानवीय माहौल कितना जरूरी है। डॉक्टर बनने की राह पर चल रहे छात्रों से समाज को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की उम्मीद होती है, न कि डर और हिंसा की।

Disclaimer :- यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार जानकारी पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल सूचना देना है। किसी भी कानूनी या आधिकारिक निष्कर्ष के लिए संबंधित संस्थानों की आधिकारिक घोषणा को ही अंतिम माना जाए।

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