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शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिवारों को धामी सरकार का बड़ा तोहफा, पेंशन ₹3,000 से बढ़कर हुई ₹5,500 !

By A S
August 27, 2026 12:35 PM
Uttarakhand State Agitators Pension :- शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिवारों को धामी सरकार का बड़ा तोहफा, पेंशन ₹3,000 से बढ़कर हुई ₹5,500 !
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Uttarakhand State Agitators Pension :- उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिए हजारों लोगों ने लंबे समय तक संघर्ष किया था। इस आंदोलन में कई लोगों ने अपना जीवन तक न्योछावर कर दिया। ऐसे शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों के लिए उत्तराखंड सरकार ने अब एक अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने शहीद राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों को मिलने वाली मासिक पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। अब शहीद राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों को हर महीने ₹3,000 की जगह ₹5,500 पेंशन मिलेगी। सरकार के इस निर्णय को उन परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए अपने अपनों को खोया है।

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शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों को मिलेगी आर्थिक राहत

मासिक पेंशन में की गई यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर शहीद आंदोलनकारियों के आश्रित परिवारों को आर्थिक सहारा देगी। लंबे समय से पेंशन की राशि बढ़ाने की मांग उठती रही थी। ऐसे में सरकार के फैसले से इन परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों और बढ़ते खर्चों को पूरा करने में पहले के मुकाबले अधिक मदद मिल सकेगी। ₹3,000 से बढ़ाकर ₹5,500 की गई पेंशन का मतलब है कि अब आश्रितों को हर महीने ₹2,500 अतिरिक्त मिलेंगे। सालाना आधार पर देखें तो पेंशन में ₹30,000 की अतिरिक्त सहायता मिलेगी। बुजुर्ग आश्रितों और ऐसे परिवारों के लिए यह रकम काफी मायने रखती है, जिनकी आर्थिक जरूरतें सीमित आय पर निर्भर हैं।

Uttarakhand State Agitators Pension :- शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिवारों को धामी सरकार का बड़ा तोहफा, पेंशन ₹3,000 से बढ़कर हुई ₹5,500 !

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, शहीदों का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस फैसले को राज्य आंदोलन के शहीदों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता से जुड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि उत्तराखंड के निर्माण में आंदोलनकारियों का योगदान और उनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इन्हीं लोगों के संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान के कारण उत्तराखंड को अलग राज्य के रूप में पहचान मिली। सरकार की जिम्मेदारी है कि शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों का सम्मान और उनकी जरूरतों का ध्यान रखा जाए। धामी सरकार का कहना है कि राज्य को शहीद आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। पेंशन में बढ़ोतरी को इसी सोच का हिस्सा माना जा रहा है।

आश्रित परिवारों ने सरकार के फैसले का किया स्वागत

पेंशन बढ़ाने के फैसले के बाद शहीद राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों और आंदोलनकारी संगठनों में खुशी देखने को मिली है। परिवारों का कहना है कि लंबे समय बाद उनकी आर्थिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा फैसला लिया गया है। खटीमा गोलीकांड के एक शहीद के आश्रित ने सरकार के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि यह बढ़ोतरी केवल आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि उनके परिवार के बलिदान को सम्मान देने का भी संकेत है।

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उनका मानना है कि बढ़ी हुई पेंशन से घर के खर्च को संभालने में काफी मदद मिलेगी। वहीं, एक शहीद आंदोलनकारी की पत्नी ने भी सरकार के फैसले को राहत देने वाला बताया। उनका कहना है कि पहले मिलने वाली पेंशन से दवा और रोजमर्रा के खर्चों को संभालना मुश्किल हो जाता था। पेंशन बढ़ने से बुजुर्ग आश्रितों को निश्चित रूप से कुछ आर्थिक राहत मिलेगी।

उत्तराखंड आंदोलन के बलिदानों को नहीं भुलाया जा सकता

उत्तराखंड राज्य का निर्माण किसी आसान राजनीतिक प्रक्रिया का परिणाम नहीं था। अलग राज्य की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन चला और इस दौरान कई आंदोलनकारियों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। आंदोलन के दौरान हुए विभिन्न गोलीकांडों में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई। 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड देश का नया राज्य बना। राज्य बनने के पीछे आंदोलनकारियों का संघर्ष और शहीदों का बलिदान सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है। यही वजह है कि शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों को मिलने वाली सहायता को केवल आर्थिक मदद के तौर पर नहीं देखा जाता, बल्कि यह उनके बलिदान के प्रति सम्मान से भी जुड़ी है।

Uttarakhand State Agitators Pension :- शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिवारों को धामी सरकार का बड़ा तोहफा, पेंशन ₹3,000 से बढ़कर हुई ₹5,500 !

पेंशन बढ़ोतरी से परिवारों को मिला सम्मान का एहसास

सरकार के इस फैसले की खास बात यह है कि इससे आर्थिक सहायता के साथ-साथ शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों में सम्मान और भरोसे की भावना भी मजबूत होगी। जिन परिवारों ने राज्य निर्माण के आंदोलन में अपने प्रियजनों को खोया, उनके लिए सरकार की ओर से उठाया गया ऐसा कदम भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड राज्य की स्थापना के पीछे जिन लोगों ने संघर्ष किया, उनकी याद और उनके परिवारों की जरूरतों को महत्व देना राज्य की जिम्मेदारी का हिस्सा है। पेंशन में यह बढ़ोतरी इसी जिम्मेदारी को निभाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

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शहीद राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों को अब पहले के मुकाबले अधिक मासिक पेंशन मिलेगी। पेंशन राशि ₹3,000 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति माह कर दी गई है। यानी हर महीने ₹2,500 की बढ़ोतरी हुई है। इससे पात्र आश्रित परिवारों को सालाना ₹30,000 की अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब महंगाई और रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से बढ़ाई गई पेंशन इन परिवारों के लिए निश्चित रूप से राहत का जरिया बन सकती है।

शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने का संकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह भी कहा है कि सरकार शहीद आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप एक मजबूत और समृद्ध उत्तराखंड बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य के निर्माण में जिन लोगों ने अपना सब कुछ दांव पर लगाया, उनके परिवारों की चिंता करना सरकार का नैतिक दायित्व है। पेंशन में बढ़ोतरी भले ही आर्थिक सहायता का फैसला है, लेकिन इसके पीछे उन परिवारों के प्रति सम्मान की भावना भी जुड़ी हुई है। सरकार का यह कदम उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों के योगदान को याद रखने और उनके परिवारों को सहारा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध जानकारी और दिए गए सरकारी निर्णय के आधार पर तैयार किया गया है। पेंशन की पात्रता, भुगतान की प्रक्रिया या अन्य नियमों से जुड़ी जानकारी में समय के साथ बदलाव हो सकता है। किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए उत्तराखंड सरकार की संबंधित अधिसूचना या विभागीय सूचना को प्राथमिकता दें।

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