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उत्तराखंड में पोस्टमैन की नौकरियों पर फिर से हरियाणा का कब्जा, उत्तराखंड के युवा देखते रह गए !

By A S
October 20, 2026 10:29 AM
Uttarakhand GDS Recruitment Result :- उत्तराखंड में पोस्टमैन की नौकरियों पर फिर से हरियाणा का कब्जा, उत्तराखंड के युवा देखते रह गए !
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Uttarakhand GDS Recruitment Result :- उत्तराखंड के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाना आसान नहीं है। सीमित अवसरों के बीच जब कोई भर्ती निकलती है, तो हजारों अभ्यर्थी मेहनत और उम्मीद के साथ आवेदन करते हैं। लेकिन जब चयन सूची में स्थानीय युवाओं की संख्या बेहद कम दिखाई देती है, तो उनके मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। सीमांत जिले में ग्रामीण डाक सेवक (GDS) भर्ती का ताजा परिणाम भी कुछ ऐसी ही चर्चा का विषय बन गया है।

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इस बार जिले में ग्रामीण डाक सेवक के कुल 65 पदों पर भर्ती होनी थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें से 60 पदों पर अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जबकि पांच पद रिक्त रह गए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि चयनित सभी 60 अभ्यर्थी हरियाणा के मूल निवासी बताए जा रहे हैं। वहीं, उत्तराखंड के स्थानीय युवा इस सूची में जगह बनाने में पीछे रह गए।

60 चयनित अभ्यर्थियों में 50 के हाईस्कूल में 100 प्रतिशत अंक

इस भर्ती परिणाम की एक और बात लोगों का ध्यान खींच रही है। बताया जा रहा है कि चयनित 60 अभ्यर्थियों में से 50 ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। ग्रामीण डाक सेवक के पदों पर चयन हाईस्कूल में प्राप्त अंकों के आधार पर होने के कारण मेरिट सूची में इन अंकों की अहम भूमिका होती है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के 100 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व दायित्वधारी महेंद्र लुंठी और होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र भट्ट समेत अन्य लोगों ने इस स्थिति पर हैरानी जताई है।

स्थानीय लोगों का सवाल है कि आखिर हरियाणा के इतने अधिक अभ्यर्थी लगातार शत-प्रतिशत अंक कैसे प्राप्त कर रहे हैं और ग्रामीण डाक सेवक जैसे पदों के लिए आवेदन क्यों कर रहे हैं। इन सवालों के बीच भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और चयन व्यवस्था को लेकर जांच की मांग भी उठ रही है। हालांकि, केवल अधिक अंक प्राप्त करना किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इन आशंकाओं की पुष्टि के लिए तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।

Uttarakhand GDS Recruitment Result :- उत्तराखंड में पोस्टमैन की नौकरियों पर फिर से हरियाणा का कब्जा, उत्तराखंड के युवा देखते रह गए !

दो महीने पहले भी सामने आया था ऐसा ही मामला

यह पहला अवसर नहीं है, जब उत्तराखंड में ग्रामीण डाक सेवक भर्ती को लेकर इस तरह की चर्चा हुई हो। करीब दो महीने पहले जिले में 51 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें से 31 पदों पर ही अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो सकी थी। उस भर्ती में उत्तराखंड के केवल तीन युवाओं को रोजगार मिलने की बात सामने आई थी, जबकि हरियाणा के 28 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। बताया गया कि चयनित हरियाणा के इन युवाओं में भी कई ने हाईस्कूल की परीक्षा में 100 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। लगातार दो भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आए इन आंकड़ों ने स्थानीय युवाओं की चिंता बढ़ा दी है। उनका मानना है कि यदि चयन प्रक्रिया और भर्ती नियमों को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान नहीं किया गया, तो पहाड़ के बेरोजगार युवाओं के लिए अवसर हासिल करना और मुश्किल महसूस हो सकता है।

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हिंदी में पूरे अंक, लेकिन कामकाज में आ रही परेशानी के आरोप

इस मामले में सबसे अधिक चर्चा चयनित अभ्यर्थियों की हिंदी भाषा से जुड़ी शिकायतों को लेकर हो रही है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए गए हैं कि हिंदी विषय में 100 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले कुछ ग्रामीण डाक सेवकों को हिंदी पढ़ने और लिखने में परेशानी हो रही है। बताया गया है कि कुछ कर्मचारियों को हिंदी में प्रार्थना पत्र लिखने और सरकारी कामकाज के दौरान भाषा संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पिथौरागढ़ से लेकर गढ़वाल क्षेत्र तक ऐसी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। यहां तक कि पिथौरागढ़ जिले में कुछ हरियाणा के ग्रामीण डाक सेवकों को हिंदी की कोचिंग दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित कर्मचारियों के पक्ष की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी भी अभ्यर्थी की भाषा संबंधी क्षमता को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यात्मक जांच आवश्यक है।

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उत्तराखंड के युवाओं की चिंता केवल नौकरी मिलने या न मिलने तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हो और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले। स्थानीय लोगों की मांग है कि मेरिट तैयार करने की व्यवस्था, प्रमाणपत्रों के सत्यापन और चयन प्रक्रिया से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही भर्ती नियमों में बदलाव की मांग भी उठ रही है, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों की परिस्थितियों और स्थानीय युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों पर उचित विचार किया जा सके। हालांकि, किसी भी बदलाव का निर्णय संबंधित विभाग और सरकार को मौजूदा नियमों तथा कानूनी प्रावधानों के आधार पर लेना होगा। फिलहाल सीमांत जिले में GDS भर्ती का परिणाम स्थानीय युवाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रही आशंकाओं का समाधान किस तरह किया जाता है।

Disclaimer :- यह लेख उपलब्ध कराई गई जानकारी और स्थानीय स्तर पर सामने आए दावों के आधार पर तैयार किया गया है। चयनित अभ्यर्थियों के अंकों, भाषा संबंधी शिकायतों और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। किसी भी अभ्यर्थी या विभाग के विरुद्ध आरोप को प्रमाणित तथ्य न माना जाए। आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित डाक विभाग की अधिसूचना और स्पष्टीकरण को प्राथमिकता दें।

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